
धर्मशिक्षण और साधनाके अभावमें आजके राजनेता और गृहस्थ अपने जीवनके अन्तिम चरणमें पहुंचनेपर भी अपने पद एवं आसक्तियोंका त्याग नहीं कर पाते तथा उसीमें लिप्त रहते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं और अपना अनमोल मनुष्य जीवन, जिसका सदुपयोग ईश्वरप्राप्ति हेतु करना चाहिए, उसे यूं ही व्यर्थ कर देते हैं । -तनुजा ठाकुर
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