यदि एक भी लेख मात्र अंग्रेजी में डाल देती हूं तो कुछ व्यक्ति जिन्हें विशेषकर अङ्ग्रेज़ी नहीं आती वे अपनी तीक्ष्ण शब्दोंमें अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं और कहते हैं कि संस्कृतनिष्ठ हिन्दी सीखनेके लिए कहती हैं तो अङ्ग्रेज़ी में क्यों लिखती हैं, ईश्वरीय कृपासे ५० से अधिक देशों के एक कोटि ३५ लक्षसे भी अधिक लोग मेरे लेखोंको प्रतिदिन पढते हैं मुझे उन सभीका विचार करना होता है क्योंकि मेरे मित्रा सूचीमें सभीको हिन्दी नहीं आती है , वैसे तो आपने देखा होगा कि अधिकतर मैं हिन्दी में ही लिखती हूं और कई बार दोनों भाषा में समय अभाव के कारण लिखना संभव नहीं होता अतः तुरंत किसी के बारे में पूर्वाग्रह न बनाएंं, दूसरों की परस्थिति को समझना और सभी का हित सोचना साधना ही है ! -तनुजा ठाकुर
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