व्यासपीठपर जूते पहनकर जाना व्यासपीठका अपमान है !


हिन्दुओ ! व्यासपीठपर पादत्राण (चप्पल या जूते) पहनकर न जाएं और न ही उसे पहनकर दीप प्रज्ज्वलन करें !
आजकल अनेक लोग व्यासपीठपर अपने पादत्राण (चप्पल या जूते) पहन कर जाते हैं ! कुछ लोग विशेष कर, मुख्य अतिथि दीप प्रज्ज्वलन करते समय भी पादत्राण पहने हुए रहते हैं ! यह सब हिन्दुओंमें धर्मशिक्षण नहीं मिलनेका ही परिणाम है ।
व्यासपीठ, ब्रह्मर्षि व्यासजीका प्रतीक पीठ है, इसका सम्मान करना सभी हिन्दुओंका धर्म है; अतः उसपर चढनेसे पूर्व जैसे आप मन्दिरकी सीढियोंको स्पर्श कर प्रणाम करते हैं, वैसे ही करना चाहिए और यदि किसीने अपने पादत्राण वहीं उतारें हो तो उसे नीचे हटाकर रख देना चाहिए । यदि कोई पदत्राण (चप्पल या जूते) पहनकर उसपर चढने जाए तो उन्हें हाथ जोडकर उसे उतारकर ऊपर जाने हेतु कहें, इस हेतु कार्यक्रमके आयोजक एक कार्यकर्ताको मंचके पास खडा करें, वैसे यह सब बतानेकी बात नहीं है, किन्तु यह मैं अनेक बार देख चुकी हूं; इसलिए मुझे बताना पड रहा है और मुझे तो यदि मंचसे बोलनेका समय दिया जाता है तो मैं इन चूकोंके विषयमें वहीं नम्रतापूर्वक बता देती हूं; क्योंकि यदि हम अपने हिन्दू भाई-बहनोंकी उनकी चूकोंको नहीं बताएंगे तो कौन बताएगा और सब जानते हुए उसे देखना व कुछ न बोलना, यह एक पापकर्म है, इस बातका सदैव ध्यान रखें । हिन्दुत्ववादी संगठनोंने भी इस बातका विशेष ध्यान देना चाहिए; क्योंकि उनसे यह चूक बार-बार होती है !
दीप जलाना अर्थात एक धार्मिक कृति है; अतः इस समय अपने पादत्राण अवश्य ही उतार देने चाहिए, उस समय मोजे भी नहीं पहनने चाहिए; क्योंकि उसे भी चर्मसे बने पदत्राणका (चप्पल या जूते) स्पर्श होकर वह भी तमसे आवेशित हो जाता है; किन्तु यदि मोजा उतारना सम्भव न हो तो ‘कम से कम’ अपने पदत्राण (चप्पल या जूते) अवश्य उतार दें !



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