कुछ दिवस पूर्व इटली में रहनेवाले भिन्न देशों के नागरिकों द्वारा अनुसरण किया जानेवाले भिन्न धर्म एवं पंथों के प्रतिनिधियों ने एक स्थानीय मेले के उदघाटन समारोह में अपने धर्म के विषय में कुछ मिनट बोलना था। मुझे यह कहते हुए क्षोभ हो रहा है कि जो सिक्ख धर्मके प्रतिनिधि ने बोला, उससे स्पष्ट आभास हो रहा था कि वे एक पूर्णत: भिन्न धर्म है ! सिक्ख , जैन, बौद्ध इन सब धर्मों की जननी वैदिक सनातन धर्म है। सनातन धर्म से अपने अस्तित्व को भिन्न बताना इन पंथों के अस्तित्व के लिए विनाशकारी हो सकता है। यदि कोई शाखा अपनी आपको जडसे विभक्त कर ले तो उसके अस्तित्वका नाश होना अवश्यमभावी हो जाता है ! वैदिक सनातन धर्म स्वयंभू और शाश्वत है , पंथ ईश्वर निर्मित नहीं आध्यात्मिक दृष्टिसे उन्नत जीवसे निर्मित होने के कारण उनपर उत्त्त्ति, स्थिति और लयका सिद्धान्त लागू होता है ! जिसकी भी की उत्तपत्ति होती है वह कालके प्रवाह में नष्ट होगा ही यह तो शास्त्र है अतः पंथोंको यदि अधिक काल तक अपने स्वरूपको बनाए रखना है तो शाश्वत और मूल धर्म का आधारको कदापि नहीं छोड़ना चाहिए ! बौद्ध, जैन और सिक्ख मूलतः हिन्दू हैं यह ध्यान रहे, मात्र हिन्दू धर्म अंतर्गत वे भिन्न पंथों के अनुयाई हैं यह ही सत्य है और शेष सब असत्य है -तनुजा ठाकुर
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