नृत्यके वास्तविक स्वरूपका हो रहा हैं लोप !


आजकल दूरदर्शनकी भिन्न प्रसार वाहिनियोंपर नृत्यके कुछ प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं; उसमें आधुनिकीकरण एवं ‘फ्यूजन’के नामपर भारतीय नृत्य शैलियोंका भी लोप हो रहा है । अधिकांश किए गए नृत्य तमोगुणी ही होते हैं । नृत्य भी एक उपासनाका अर्थात ईश्वर प्राप्तिका माध्यम है; किन्तु योग्य साधना न करनेके कारण नृत्यके वास्तविक स्वरूपका भी लोप हो रहा है एवं तमोगुणी व आसुरी नृत्य शैली प्रचलित हो रही है और दुःखकी बात यह है कि वहां बैठे निर्णायक ऐसे नृत्यकी स्तुति करते नहीं थकते हैं; इसलिए समाजको साधना करवानेकी अत्यन्त आवश्यकता है; किन्तु यह इस निधर्मी शासन व्यवस्थामें सम्भव नहीं है ।



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