संस्कृतनिष्ठ हिन्दी सम्बन्धी कुछ ध्यानमें रखने योग्य तथ्य (भाग-१)


हिन्दी भाषाको संस्कृतनिष्ठ बनाने हेतु तमोगुणी उर्दू व अंग्रेजी भाषाका उपयोग करना टालें !
संस्कृतनिष्ठ हिन्दी भाषाको, हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात, सर्वत्र प्रयोगमें लाया जाएगा; अतः संस्कृतनिष्ठ हिन्दी सीखें ! आपको पुनः स्मरण कराने हेतु इसके महत्त्वपूर्ण तथ्योंका पुनः प्रकाशन किया जा रहा है ।
वर्तमान कालमें प्रायः हम हिन्दी बोलते अथवा लिखते समय सहज ही उर्दू एवं अन्य विदेशी भाषाओंसे उद्धृत शब्दोंका प्रयोग करते रहते हैं । वैदिक संस्कृति सत्त्व गुण आधारित है एवं संस्कृतनिष्ठ हिन्दी ही सात्त्विक भाषा है । उर्दू एवं अन्य विदेशी भाषाओंसे उद्धृत शब्दोंका प्रयोग करनेसे हमारी हिन्दी भाषाकी सात्त्विकता नष्ट होती जा रही है; अतः संस्कृतनिष्ठ हिन्दी शब्दोंका प्रयोग कर, भाषाके प्रति अपने धर्मका निर्वाह करें !



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