गाय एवं भैंसमें कुछ आश्चर्यजनक अन्तर !


१. भैंस अपने बच्चेसे पीठ फेरकर बैठती है, चाहे उसके बच्चेको कुत्ते खा जाएं, वह नहीं बचाएगी, जबकि गायके बच्चेके निकट अपरिचित व्यक्ति तो क्या ? सिंह भी आ जाए, वो प्राण दे देगी; परन्तु जीते-जी बच्चेपर आंच नहीं आने देगी । इसीलिए उसके दूधमें स्नेहका गुण प्रचुर मात्रामें होता है ।

२. भैंसके दो झोटे बडे होकर, अर्थात दो झोटे, एक गांवमें मिलकर नहीं रह सकते । आमना-सामना होते ही एक दूसरेको मारेंगे, भाई-भाईका शत्रु होता है; परन्तु गायके १० नन्दी (साण्ड) इकट्ठे रह सकते हैं, जो बन्धुत्वका प्रमाण है ।

३. भैंसको अस्वच्छता रुचिकर है, वह कीचडमें लथपथ रहेगी; किन्तु गाय, अपने गोबरपर भी नहीं बैठेगी, उसे स्वच्छता प्रिय होती है ।

४. भैंसको घरसे २ कि.मी. दूर, सरोवरमें छोडकर आ जाएं, वह घर नहीं आ सकती, उसकी स्मरणशक्ति क्षीण होती है । वहीं गायको घरसे ५ कि.मी. दूर भी छोड दें, वह घरका मार्ग जानती है, आ जाएगी । गायके दूधमें स्मरणशक्ति बढानेकी क्षमता होती है ।

५. दस भैंस बांधकर, २० फुट दूरसे उनके बच्चोंको छोड दें, एक भी बच्चा अपनी मांका अभिज्ञान नहीं कर सकता, जबकि गोशालाओंमें दिनभर गाय व बच्चेको भिन्न-भिन्न बाडोंमें रखते हैं, सायंकाल जब सबका मिलन होता है, तब सभी (सहस्रों) बच्चे अपनी-अपनी मांका अभिज्ञानकर दूध पीते हैं, ये है गोदुग्धकी स्मरणशक्ति ।

६. जब भैंसका दूध निकालते हैं, तब भैंस सारा दूध दे देती है; परन्तु गाय थोडासा दूध ऊपर चढा लेती है तथा जब उसके बच्चेको छोडेंगे, तब उस चढाए हुए दूधको उतार देती है । यह मांके गुण हैं, जो भैंसमें नहीं हैं ।

७. गलीमें बच्चे खेल रहे हों एवं भैंस भागती आ जाए, तो बच्चोंपर पांव अवश्य रखेगी; किन्तु गाय आ जाए, तो कभी भी बच्चोंपर पांव नहीं रखेगी ।

८. भैंस, धूप एवं ‘गर्मी’ सहन नहीं कर सकती, जबकि गाय, मई-जूनमें भी धूपमें बैठ सकती है ।

९. भैंसका दूध तामसिक होता है, जबकि गायका सात्त्विक । भैंसका दूध आलस्य भरा होता है, उसका बच्चा दिनभर ऐसे पडा रहेगा, जैसे अफीम अथवा भांग खाकर पडा है । जब दूध निकालनेका समय होगा, तो स्वामी उसे मारकर उठाएगा; परन्तु गायका बछडा इतना उछलेगा कि आप व्यवस्थित रूपसे रस्सी भी नहीं खोल पाएंगे ।



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