श्रीगुरु उवाच

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शरीरमें विषाणु हों तो वे शरीरद्वारा ली गई औषधिसे नष्ट होते हैं । उसी प्रकार वातावरणके नकारात्मक रज-तम, यज्ञके सूक्ष्म तथा स्थूल धुएंसे नष्ट होते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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हमें ईश्वरकी सहायता क्यों प्राप्त नहीं होती ? इसपर हिन्दुओंने विचार करना चाहिए तथा सहायता प्राप्त होने हेतु साधना आरम्भ करनी चाहिए । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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शास्त्र वचन


पुण्यंप्रज्ञावर्धयतिक्रियमाणंपुन: पुन: ।  वृद्धप्रज्ञ: पुण्यमेवनित्यमारभतेनर: ॥ – विदुर नीति अर्थ : बार-बार क्रियमाणद्वारा पुण्य करनेसे मनुष्यकी प्रज्ञा बढती है और जिसका विवेक जाग्रत होता है, ऐसा व्यक्ति सदैव पुण्य कर्म करता है ।

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चिरन्तन आनन्दकी प्राप्ति हेतु साधनाके अतिरिक्त और कोई पर्याय नहीं हैं ।  ईश्वरपर तथा साधनापर विश्वास न हो, तब भी शाश्वत आनन्दकी इच्छा प्रत्येकजनको होती है ।  वह केवल साधनासे प्राप्त होता है, यह ज्ञात होनेपर, साधनाका पर्याय न होनेसे व्यक्ति साधनाकी ओर मुडता है ।  – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था […]

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विद्यालयीन शिक्षासे लेकर स्नातकोत्तर शिक्षणतक, किसी भी कक्षामें मानवताकी सीख न दिए जानेके कारण प्रत्येक क्षेत्रमें जनताको लूटनेवाले व्यावसायिक एवं चाकरी (नौकरी) करनेवाले निर्माण हुए हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत  आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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ईश्वरप्राप्तिके लिये तन, मन, धनका त्याग करना पडता है; अतः सम्पूर्ण जीवन धनप्राप्तिमें समय व्यर्थ करनेकी अपेक्षा सेवा करके धनके साथ तन और मनका भी त्याग करनेसे ईश्वरप्राप्ति शीघ्र होती है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके नामपर अपने मनके अनुसार वर्तन करनेवाले लोग वैद्यकीय अथवा न्यायालीन आदि किसी भी क्षेत्रमें अपने मनानुसार नहींकर सकते । केवल आध्यात्मिक परम्पराओंके सन्दर्भमें अपने मनके अनुसार करते हैं ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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जगतका एकमेव धर्म है, सनातन हिन्दूधर्म उत्पत्ति, स्थिति और लय’, इस सिद्धान्तानुसार विविध सम्प्रदायोंकी स्थापना होती है तथा कुछ कालांतर पश्चात उनका  लय होता है अर्थात उनका अस्तित्व नहीं रहता । इसके विपरीत सनातन हिन्दूधर्मकी उत्पत्ति नहीं है अर्थात अनादि होनेके कारण अनन्त कालतक रहता है । यह हिन्दूधर्मका वैशिष्ट्य है । इस जगतमें दूसरा […]

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हिन्दू धर्ममें बताया गया बृहद ज्ञान क्या अन्य किसी पन्थमें है ? विज्ञानको भी ज्ञात है क्या ? – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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सच्चिदानन्द ईश्वरकी प्राप्ति कैसे की जाए ?, यह आध्यात्मशास्त्र बताता है, तो ‘ईश्वर ही नहीं है’ ऐसा कुछ विज्ञानवादी अर्थात बुद्धिप्रामाण्यवादी चिल्ला-चिल्लाकर  कहते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)

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