श्रीगुरु उवाच


बुद्धिप्रामाण्यवादियोंकी हास्यास्पद सोच !
कोई बालक ‘माता-पिता कौन ?’ इसकी शोध (खोज) करनेका प्रयत्न करे तथा उत्तर न मिलनेपर, ‘माता-पिता होते ही नहीं हैं’, उसका यह कथन जितना हास्यास्पद है, उतना ही बुद्धिप्रामाण्यवादियोंका ‘ईश्वर नहीं हैं’, यह कहना हास्यास्पद है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


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