श्रीगुरु उवाच


साम्यवादियोंको प्रारब्ध इत्यादि शब्द भी ज्ञात नहीं होते; अतः वे साम्यवाद शब्दका उपयोगकर, उपहासके पात्र सिद्ध होते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात


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