श्रीगुरु उवाच : अभिभावको, बच्चोंका जीवन सार्थक हो, इसलिए उन्हें  साधना सिखाएं !


‘अभिभावक उनके बच्चोंमें कला-गुणोंका विकास हो, इसलिए उनकी रुचिनुसार संगीत, कला इत्यादि कलाओंकी उन्हें शिक्षा देते हैं; परन्तु अत्यल्प अभिभावक बच्चोंका जन्म सार्थक हो, इस हेतु साधना सीखनेमें उनकी सहायता करते    हैं ।’ – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले



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