अति सयाने बुद्धिप्रमाणवादी !


‘साधनाकर सूक्ष्म स्तरीय ज्ञान होनेपर यज्ञका महत्त्व समझमें आता है । वह न समझनेके कारण अति चतुर तर्कवादी (बुद्धिप्रमाणवादी) बडबडाते फिरते हैं, ‘यज्ञमें वस्तुएं जलानेकी अपेक्षा उन्हें निर्धनोंको दो !’ – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले



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