जून १९, २०१९
५ जुलाई, २००५ में अयोध्यामें हुए आतंकी आक्रमणके १४ वर्ष पश्चात न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय आ गया है, जिसमें ४ आरोपियों इरफान, मोहम्मद शकील, मोहम्मद नसीम, आशिक इकबालको आजीवन कारावास दिया गया है । २००६ में इसकी सुनवाईको सुरक्षा कारणोंसे फैजाबादसे इलाहबाद स्थानांतरित कर दिया गया था ।
मोहम्मद अजीजको साक्ष्यके अभावमें दोषमुक्त कर दिया गया । वह आतंकी आक्रमण लश्कर-ए-तैयबाने किया था । इसमें एक यात्रा मार्गदर्शक सहित ७ लोगोंकी मृत्यु हो गई थी, वहीं पुलिसने कार्यवाहीकर ५ आतंकियोंको ढेर कर दिया था ।
मारे गए आतंकियोंके पास मिली सामग्रियोंके आधारपर ५ आरोपितोंको बन्दी बनाया गया था, जिनमेंसे ४ को न्यायालयने अब दोषी पाते हुए दण्ड दिया । साधु-संतोंके मध्य इस आक्रमणको लेकर भारी आक्रोश था और वे अपराधियोंके लिए कडा दण्ड चाहते थे ।
इन पांचों आरोपियोंपर आतंकियोंकी सहायता करनेका प्रकरण चलाया जा रहा था । साधु-संतोंने इस निर्णयके पश्चात कहा कि इसमें अत्यधिनन लम्बा समय लगा; परन्तु भगवान रामने भी १४ वर्षोंका ही वनवास झेला था, इस बार भी १४ वर्षों पश्चात निर्णय आया है । संतोंने आतंकियोंके लिए फांसीकी मांग की थी ।
“इन आतंकियोंको मृत्युदंड क्यों नहीं दिया गया और १४ वर्षों पश्चात हुए न्यायको क्या न्याय माना जा सकता है ? क्या आतंकका धर्म देशवासियोंको ज्ञात हुआ ? ये सब इसलिए पूछ रहे हैं; क्योंकि मीडिया जाने क्यों आरोपियोंके नाम बतानेसे पीछे हटता है !! “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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