जून १३, २०१९
देहलीके उत्तर-पूर्वी जनपदके हर्ष विहार क्षेत्रमें गोवंशकी हत्याकर मांसके टुकडे फेंकनेवाले आरोपी इमरानको देहली पुलिसने बुधवार, १२ जूनको लोनी गोल चक्करसे बन्दी बना लिया । साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाडनेके लिए होलीवाले दिन (२१ मार्च) उसने तीन मित्रोंके साथ मिलकर मांसके टुकडे एक फर्मकी भीतके (दीवारके) पास फेंके थे । इस घटनाको लेकर वहां तनावका वातावरण हो गया था; परन्तु पुलिसने समय रहते लोगोंको समझा-बुझाकर प्रकरणको शांत कर दिया था ।
स्थानीय पुलिसने घटनाके कुछ ही दिनके भीतर तीन आरोपियों परवेज, लुकमान व इंशाह आलमको बन्दी बना लिया था । इमरान भूमिगत हो गया था । इसके पश्चात अभियोगको विशेष विभागमें स्थानांतरितकर पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायकने उसे बन्दी बनवानेको लेकर २५ सहस्र रुपएका पुरस्कार घोषित किया था । इमरान गाजियाबादका रहनेवाला है । उसके परिवारके सदस्य वर्षोंसे पशुओंके क्रय-विक्रयका कार्य करते हैं ।
पुलिसको सूचना मिली थी कि इस कामके बहाने इमरान गोवंशकी हत्याकर मांस विक्रय करता है । इमरानने बताया कि हर्ष विहारमें साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न करनेके लिए उसने तीन मित्रोंके साथ मिलकर २० मार्चकी देर रात गोवंशकी हत्या की और होलीवाले दिन मांसके टुकडे एक फर्मकी भीतके पास फेंक दिए थे ।
वर्ष २०१६ में उसने लोनीमें भैंसके शरीरमें टीकेकेद्वारा विष पहुंचा दिया था । उसी वर्ष मादक पदार्थ विक्रयके आरोपमें पुलिसने उसे बन्दी बनाया था । हर्ष विहारकी घटनाके पश्चात इमरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व देहली-एनसीआरमें किरायेपर कक्ष लेकर छिपता रहा । एसीपी अतर सिंहको बुधवारको सूचना मिली थी कि वह इनदिनों उत्तराखंडमें छिपा है और परिवारके सदस्योंसे मिलनेके लिए अपने घर आनेवाला है । इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह व एसआइ आदित्यके नेतृत्वमें दलने उसे लोनी गोल चक्करके पाससे बन्दी बना लिया ।
“जिहादी अपनी विकृत मानसिकताके चलते ऐसे कुकर्म करनेसे भी भयभीत नहीं होता है । इतना दुस्साहस जिहादी किस मानसिकतासे कर लेते हैं कि गोमांस फेंककर क्षेत्रमें उपद्रव करवा दे ? इससे स्पष्ट है कि इनके मनमें विधानकाभय है ही नहीं ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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