जून ४, २०१९
पश्चिम बंगालमें ‘जय श्रीराम’का उद्घोष एक अपराध बन चुका है, जिसके लिए दण्ड भी दिया जाता है । वर्तमान प्रकरण कलकत्ता विश्वविद्यालयका है, जहां एक कर्मचारीका स्थानान्तरण केवल इसलिए कर दिया गया; क्योंकि उन्होंने संस्थानमें ‘जय श्रीराम’का उद्घोष लगाया था । समाचारके अनुसार, बंगाल विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषदने यह दावा किया है कि कलकत्ता विश्वविद्यालयने कर्मचारीका स्थानांतरण मात्र इस बातपर कर दिया; क्योंकि उसने ‘जय श्रीराम’का उद्घोष किया था ।
कर्मचारी परिषदने इस सम्बन्धमें विश्वविद्यालयकी कुलपति सोनाली चक्रवर्ती बनर्जीको एक प्रतिनियुक्ति सौंपी है । जानकारीके अनुसार, परिषदके सदस्य प्रॉलोय दत्ताका स्थानान्तरण स्ट्रीट कैंपससे नादिया जनपदके हरिंगटामें कर दिया है ।
प्रॉलोय दत्ताने कहा, ‘‘मैं ६ वर्षसे कुलपतिके कार्यालयमें कार्य कर रहा था । मैंने लगनसे काम किया । कुछ दिन पहले मैंने एक प्रदर्शनमें भाग लिया था, जिसमें मैंने जय श्रीरामका उद्घोष किया था । अब मेरा स्थानान्तरण हरिंगटा कर दिया गया है, जो मेरे घरसे अत्यधिक दूर है । कुलपतिको अपने कर्मचारीका स्थानांतरण करनेका पूर्ण अधिकार है; परन्तु मैंने कोई अपराध नहीं किया है ।’’
“‘जय श्रीराम’को लेकर ममता बनर्जीकी तिलमिलाहट आए दिन उजागर होती रहती है । अब ममता शासनने गुप्तचर विभागको भी उन स्थानोंका संज्ञान करनेका आदेश दिया, जहां ममताको देखकर ‘जय श्रीराम’के उद्घोष किए जाते हैं । इस पैशाचिक वृत्तिका अन्त अब हिन्दू ही आनेवाले विधानसभा मतदानमें करेंगें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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