ध्वनिप्रसारक यन्त्रपर (लाउडस्पीकरपर) भजन-कीर्तनसे जिहादियोंने नमाजमें विघ्नका बहाना बनाकर पुजारीको पीटा, किया उत्पात और उठा ले गए प्रतिमा


जून ४, २०१९

पीलीभीतमें समुदाय विशेषके लोगोंको भजन-कीर्तन पसन्द न आनेपर उन्होंने मन्दिरमें पहुंचकर तोडफोड की । घटना उत्तर प्रदेशके पीलीभीत स्थित रौहनिया गांवकी है । मंगलवार, ४ जूनको जब वहां स्थित एक मन्दिरमें भजन-कीर्तन चल रहा था, तब समुदाय विशेषके लोग वहां पहुंच गए और पूजामें विघ्न डाला । उन्होंनें न केवल ध्वनिप्रसारक यन्त्र (लाउडस्पीकर) तोड डाला वरन धार्मिक पंचांगको भी फाड डाला । वहां भजन-कीर्तन करते लोग असहाय बने रहे और बदमाश वहांसे देवी-देवताओंकी प्रतिमाएं उठा कर ले गए । पुलिसने भी इस बातकी पुष्टि की है ।

‘अमर उजाला’के पीलीभीत संस्करणमें प्रकाशित समाचारके अनुसार, किसी भी प्रकारकी साम्प्रदायिक तनावकी स्थितिसे बचनेके लिए पुलिस वहां पहुंची हुई है । लोगोंको समझा-बुझा कर स्थितिको शांत कराया गया । ऐसा पहली बार नहीं था, जब यहां ध्वनिप्रसारक यन्त्रसे भजन गया जा रहा हो । सन्ध्यामें वहां लोग धार्मिक कार्यक्रमोंमें व्यस्त रहते हैं । गांवमें हिन्दू और मुस्लिम, दोनों ही समुदायके लोग रहते हैं । इसके पश्चात भी मुस्लिम गुंडोंने पुजारीकी पिटाई भी की ।

‘दैनिक जागरण’के अनुसार समुदाय विशेषके लोगोंने ईद होने और नमाजका समय हो जानेकी बात करते हुए कहा कि अब उनका त्यौहार आ गया है, इसीलिए ध्वनिप्रसारक यन्त्रपर भजन नहीं होना चाहिए । श्रद्धालुओंका तर्क था कि वे गांवके बाहर आकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं, जबकि नमाज गांवके भीतर पढी जाती है । इसी बातको लेकर कहासुनी हुई और फिर उत्पात मचाया गया !

“इसलिए शास्त्रके साथ शस्त्रकी शिक्षा दी जाती है । शस्त्र अपनी रक्षा हेतु; परन्तु दुखद है कि हिन्दुओंने शस्त्र तो छोडे ही छोडे (जिसके कारण धर्मान्ध आए दिन ऐसे कृत्य करते हैं और कहीं-कहीं तो हत्याएं भी करते हैं) साथ ही शास्त्रोंको भी ठीकसे नहीं अपनाया । यह हमारी कर्महीनताका ही परिणाम है कि जिहादी हमें हमारे ही देशमें धमका रहे हैं और भगवानकी प्रतिमा भी उठाकर ले गए और भजन करनेवाले देखते ही रहे ! यदि वहां कुछ क्षत्रियवीर होते तो जिहादी ऐसा दुस्साहस न करते; अतः शास्त्रके साथ शस्त्र आवयक है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ


स्रोत : ऑप इण्डिया



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