पतिसे पूर्व बेटीको दूध दिया तो मिला ‘तीन तलाक’, दहेजके लिए भी होती थी मारपीट
१८ फरवरी, २०२२
घटना अहमदाबादके करंजकी है, जहां एक मुसलमान महिलाने अपने पति व ससुरालवालोंके विरुद्ध १५ फरवरी २०२२ को परिवाद प्रविष्ट करवाया है ।
पीडिताका आरोप है कि उसका ‘निकाह’ २००८ में हुआ था, तबसे ससुरालवाले दहेजके लिए प्रताडित करते रहे हैं । दिसम्बर२०२१ से पतिने उससे मायकेसे १ लाख रुपये लानेको कहा, तबसे पति भी उससे अपशब्द कहता व मारपीट करता रहता है ।
एक रात्रि १० बजे उसके पतिने उससे दूध मांगा; पर उसने पतिसे पहले ५ वर्षीय बेटीको दूध दे दिया । इससे क्रोधित पतिने उसे ‘तीन तलाक’ दे दिया ।
वर्ष २०१९ से मोदी शासनने तीन तलाकके विरुद्ध विधान गठित किया है, जिसमें अपराधीको ३ वर्ष कारावास व आर्थिक दण्डका प्रावधान है ।
‘तीन तलाक’पर प्रतिबन्धके उपरान्त भी ‘तलाक’ देनेका अर्थ है कि मुसलमानोंको भारतके संविधानमें विश्वास नहीं है । इसी प्रकार वे ‘हिजाब’पर भी व्यवहार कर रहे हैं ! अब भारत शासनको चाहिए कि देशमें शीघ्र समान नागरिक विधान लागू करे और विधानका पालन न करनेवालोंको कठोरतासे दण्डित करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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