जून १२, २०१९
काशीके साधु-सन्तोंने शासनसे एक नूतन मांग कर दी है । अखिल भारतीय सन्त समितिने अल्पसंख्यकके नामपर ५ कोटि मुसलमानोंको छात्रवृत्ति देनेके केन्द्र शासनके निर्णयका विरोध किया है । सन्त समाजका कहना है कि देशके ८ ऐसे राज्य हैं, जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हैं तो क्या इन राज्योंमें हिन्दुओंको अल्पसंख्यक माना जाएगा और उन्हें अल्पसंख्यकोंवाले अधिकार मिलेंगें ?
सन्त समाजने केन्द्रको पत्र लिखकर अल्पसंख्यककी परिभाषा स्पष्ट करनेको कहा है । ईदके अवसरपर ५ कोटि अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओंको छात्रवृतिके रूपमें देनेका केन्द्र शासनका उपहार काशीके सन्त समाजको रास नहीं आ रहा है; इसलिए काशीके सन्त समाजने केन्द्र शासन सहित सम्बन्धित विभाग-मन्त्रालयको पत्र लिखकर अल्पसंख्यककी परिभाषा पूछी है; क्योंकि ८ राज्योंमें हिन्दू भी अल्पसंख्यक हैं ।
अल्पसंख्यक वोटोंको साधनेके लिए भाजपाके मनमें अल्पसंख्यकोंके प्रति उमडे प्रेमका ही परिणाम था कि ईदके दिवस अल्पसंख्यक समुदायके ५ कोटि छात्रोंको स्कॉलरशिप (छात्रवृति) देनेकी घोषणा की गई । शासनकी इसी मंशापर अखिल भारतीय सन्त समितिने अपने पत्रकेद्वारा प्रश्न खडा किया है, जिसमें उन्होंने न केवल वर्तमान शासनसे अल्पसंख्यककी परिभाषा पूछी है ।
प्रधानमन्त्री, अल्पसंख्यक कल्याण मन्त्रालय, गृह मन्त्रालय और अल्पसंख्यक आयोगको ९ बिन्दुओंपर पत्र लिखनेवाले अखिल भारतीय सन्त समितिके महामन्त्री स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वतीने बताया कि भारतीय संविधानकी प्रस्तावनामें ही एक जन एक राष्ट्रकी भावनाकी बात कही गई है; इसलिए अल्पसंख्यक शब्दकी परिभाषा कहींसे संविधानमें तो नहीं है । दिसम्बर १९९२ में कांग्रेसद्वारा प्रथम बार अल्पसंख्यक आयोगका गठन संसदमें प्रस्ताव लाकर किया गया और यह संविधानकी मूल अवधारणाके विरुद्ध था । ऐसेमें प्रश्न है कि भारतमें अल्पसंख्यक कौन हैं ?
संत समाजका कहना है कि भारतके आठ राज्योंमें (जम्मू-कश्मीर, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, लक्षद्वीप, नगालैंड, अरुणांचल प्रदेश और मणिपुर) हिन्दू भी अल्पसंख्यक हैं । ये ढाई प्रतिशतसे लेकर ३८ प्रतिशततक ही यहां हिन्दू हैं तो क्या इन ८ राज्योंमें अल्पसंख्यक हिन्दुओंको सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए ?
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालयने एक बार पुनः चुनावके समय अल्पसंख्यक आयोगसे मांग की है कि अल्पसंख्यककी परिभाषा राज्यवार निर्धारित करके बताइए और हम शासनसे यही मांग कर रहे हैं; इसलिए सरकार छात्रवृति अल्पसंख्यकोंको वितरित करे, हमें प्रसन्नता है; परन्तु उसमें आठ राज्योंके अल्पसंख्यक हिंदू भी सम्मिलित हों ।
“तो मोदी शासन अब कांग्रेस भाग-२ बननेकी ओर तीव्रतासे बढ रहा है । साधु-सन्तोंने कुछ अनुचित मांग तो रखी नहीं है ! अब जब हिन्दू अपनी मूढतासे ८ राज्योंमें अल्पसंख्यक हो ही गया है तो उन्हें अल्पसंख्यक क्यों नहीं माना जाना चाहिए ? राष्ट्रीय रूपसे किसीको अल्पसंख्यक कैसे बताया जा सकता है ? मोदी शासन नियमानुसार उन अल्पसंख्यक हिन्दुओंको भी वे सुविधएं प्रदान करे ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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