जून ११, २०१९
तमिल चलचित्रोंके निर्देशक पा. रंजीतने हिंदुत्व और महान तमिल शासक राजाराज चोलको लेकर विष उगला है । रजनीकांत अभिनीत ‘कबाली’ व ‘काला’ जैसी बडे चलचित्र निर्देशित कर चुके पा रंजीत आरम्भसे ही अपने चलचित्रोंकेद्वारा वामपंथी विचारधाराका प्रचार करते रहे हैं । अब नूतन विवाद खडा करते हुए विवादित चलचित्र संचालकने कहा कि हिन्दुओंने दलितोंसे भूमि छीन ली है । रंजीतने हिन्दुओं व दलितोंको पृथक करके देखनेका प्रयास किया । २०१२ में हास्य ‘अताकथी’से निर्देशनके क्षेत्रमें आनेवाले रंजीतने कहा कि शासनको सभी मठोंकी भूमि छीनकर उसे वापस दलितोंको दे देना चाहिए !!
उन्होंने इतिहासकी बात छेडते हुए महान तमिल शासक राजाराज चोलको एक भूमि हडपनेवाला बताया और कहा कि उनका शासन तमिल इतिहासके अन्धकार भरे युगमेंसे एक था । उन्होंने दावा किया कि राजाराज चोलके समय ही जाति सम्बन्धी अत्याचार आरम्भ हुए थे । जबकि, इतिहास इसके एकदम विपरित है । शैव सम्प्रदायके पुरोधा राजाराज चोलने वैष्णव सम्प्रदायको भी बढावा दिया और भगवान विष्णुके कई मंदिर बनवाए । उन्होंने कई बौद्ध स्थलोंका भी निर्माण करवाया । उन्हें धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष राजाके रूपमें स्मरण किया जाता है ।
राजाराज चोलका साम्राज्य कलिंगसे लेकर लंकातक था । उस समयके शिलालेखोंके अनुसार, भगवान श्रीरामसे उनकी तुलना करते हुए लिखा गया है कि राजाराज चोल उनके सदृश ही श्री लंकामें विजय पताका फहरानेवाले भारतीय राजा थे । नौसेनाके प्रयोगके लिए सुप्रसिद्ध राजाराज चोल एक बडे योद्धा भी थे । मालदीवके कुछ भागपर भी उनका राज चलता था । ‘यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट’के अंतर्गत आनेवाला बृहदेश्वर मंदिरका निर्माण भी राजाराज चोलने ही करवाया था । बादमें मदुरईपर नियन्त्रण रखनेवाले मुगलोंने मंदिरको हानि पहुंचाई ।
हिन्दुओं व राजाराज चोलके बारेमें आपत्तिजनक टिप्पणी देनेवाले पा रंजीतके विरुद्ध सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर (सोशल मीडियापर) लोगोंने रोष प्रकट किया । गोहत्याका समर्थन करते हुए पा रंजीतने आगे कहा कि यदि गाय हिन्दुओंकी माता है, तो वह हिन्दुओंके भगवानको खानेवाले व्यक्ति हैं । ये सारी बातें बोलते समय रंजीतने स्वयंको पेरियार और अम्बेडकरका भक्त बताया । उन्होंने इस बातको अनदेखा कर दिया कि चीनसे व्यापारिक संधिकर राजाराज चोलने भारतीय दबदबा बढानेका काम किया था । अभी पा रंजीत स्वतन्त्रता सेनानी बिरसा मुंडापर चलचित्र बनानेकी तैयारी कर रहे हैं । एक और अचम्भित करनेवाला दावा करते हुए उन्होंने कहा कि राजाराज चोलके कालमें सैकडों युवतियोंको वेश्यावृत्तिमें धकेल दिया गया था, जबकि इतिहासमें ऐसा कोई तथ्य प्रविष्ट नहीं है ।
“ऐसे निधर्मी, जो हिन्दुओं और हिन्दू राजाओंके प्रति ऐसा विष उगलकर समाजको विभाजित करनेका कार्य कर रहे हैं, ये समस्त हिन्दुओंके अपराधी हैं और इसके लिए ये दण्डके पात्र हैं; परन्तु जैसाकि आज हमारे समाजमें पागल और विक्षिप्त बुद्धिजीवियोंकी संख्या बढती ही जा रही है, उसका देखते हुए सभीने इनका मुखर होकर विरोध करना चाहिए और इन्हें न्यायालयमें खींचकर इनके विरुध्द अभियोग प्रविष्ट करना चाहिए ताकि इनकी विषकारी मानसिकता उजागर हो सके !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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