जून ७, २०१९
इंदौरमें एक हिन्दू चिकित्सककी पत्नी और उसके पुत्रको रफीक रशीद नामक धर्मान्धने चाकूसे काट डाला है । रफीकद्वारा किए गए आक्रमणमें चिकित्सककी पत्नीकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि पुत्र जीवन और मृत्युसे जूझ रहा है ।
प्रकरण मध्य प्रदेशके इंदौरका है, जहांपर रफीक रशीद नामक व्यक्तिको शरीरमें खुजली हो रही थी । वो चिकित्साके लिए चिकित्सक रामकृष्ण वर्माके औषधालयमें पहुंचा, जो अपने घरपर ही चलाते थे ।
चिकित्सकने उसे औषधियां लिख दी; परन्तु औषधिसे रफीक रशीदकी खुजली ठीक नहीं हुई । इसपर रफीक क्रोधित हो गया और इंदौरके मालवा हिल्स क्षेत्रमें ५ जूनको रामकृष्ण वर्माके घरपर पहुंचा ।
रामकृष्ण वर्माकी पत्नी लता और उनका पुत्र घरपर थे, रफीकने घंटी बजाई तो लता जिनकी आयु ५० वर्ष थी, उन्होंने द्वार खोला । रफीकने अपशब्द कहने आरम्भ कर दिए और कहा कि चिकित्सक कहांपर है ? तदोपरान्त लताने कहा कि रामकृष्ण यहां नहीं है, वो अपने किसी कार्यसे देहली गए हैं ।
इतनेमें रफीकने चाकू निकाला और लताको चाकुओंसे गोदना आरम्भ कर दिया । लताने शोर किया तो उनका १९ वर्षीय पुत्र अखिलेश उनको बचानेके लिए दौडा तो रफीक रशीदने उसे भी चाकुओंसे मार डाला ।
लता और अखिलेशको रफीकने चाकुओंसे कई बार काटा और गोदा । दोनोंको मरा समझकर रफीक रशीद वहांसे भाग गया; परन्तु भागते हुए रफीकको किसीप्रकार अन्य लोगोंने पकड लिया और पुलिसको सौंप दिया । स्थानीय लोगोंने लता और अखिलेशको चिकित्सालय पहुंचाया; परन्तु लताकी मृत्यु हो गई, जबकि अखिलेश बुरी स्तिथिमें है ।
“तो धर्मान्धोंने अब चिकित्सा हिन्दुओंसे करवानी है; परन्तु ठीक नहीं होंगें तो मारनेपर उतर आएंगें ! समाजमें रह रहे ऐसे आतंकियोंको कौन पोषित किए है कि इन्हें तनिक भी भय नहीं है !! अब क्या कोई चिकित्सक किसी रफीककी चिकित्सा करेगा ? क्या चिकित्सककी पत्नी और पुत्रको केवल इसलिए मार दिया गया कि धर्मान्धकी खुजली ठीक नहीं हुई ? यह तो इस्लामिक विष है, जो हिन्दुओंको देखते ही बाहर आता है । “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : डीबीएन
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