१२४ जीर्ण-शीर्ण मन्दिरोंका गौरव पुनः लानेमें जुटी ‘भाजपा’की महापौर प्रमिला पांडेय, सहस्र वर्ष प्राचीन मन्दिरमें खण्डित कर दी गई थीं मूर्तियां
३१ मई, २०२२
देशके पृथक-पृथक राज्योंमें इन दिनों हिन्दू मन्दिरोंका प्रकरण चर्चित है । ऐसेमें उत्तरप्रदेशके कानपुरकी महापौर व भारतीय जनता पार्टीकी महिला नेता प्रमिला पांडेयने अपने क्षेत्रमें जीर्ण-शीर्ण अवस्थामें पडे मन्दिरोंकी स्थिति सुधारनेका उत्तरदायित्व लिया है । इसी क्रममें सोमवारको वह बाबूपुरवाके द्वार क्रमाङ्क ६ के निकट प्राचीन शिव मन्दिरका निरीक्षण करने पहुंची और पाया कि वहां मूर्तियोंको खण्डित किया गया था ।
स्थानीय लोगोंने परिवाद किया कि मन्दिरोंसे मूर्तियोंको हटाया जा रहा है और समूचे मन्दिर परिसरमें आधिपत्यका प्रयास हो रहा है । स्थानीय लोगोंके अनुसार, इस कार्यको ‘भूमाफियाओं’के माध्यमसे किया जा रहा है । मन्दिर सहस्र वर्ष प्राचीन है, जिसमें मां पार्वती, हनुमानजीकी मूर्तियां रखी हुई थीं । लोगोंका परिवाद सुननेके उपरान्त महपौर प्रमिला पांडेयने सम्बन्धित अधिकारीको निर्देश दिए कि जबतक स्थानका सत्यापन न हो, तबतक वहां किसी निर्माणकी आज्ञा न दी जाए ।
विदित हो कि इससे पूर्व कानपुर नगर निगमकी ओरसे नगरमें १२४ मन्दिरोंको चिह्नित करनेका कार्य किया गया था । ये सभी मन्दिर वही थे, जिनकी स्थिति जीर्ण-शीर्ण थी या फिर इन्हें ‘कूडा’घरोंमें परिवर्तित कर दिया गया था । महापौर प्रमिला पांडेय इन मन्दिरोंको पुनर्जीवित करनेके प्रयासमें जुटी हैं । २८ मई को प्रकाशित प्रतिवेदनके अनुसार, उन्होंने विगत शनिवारको ८ मन्दिरोंका ‘दौरा’ किया था । मन्दिरोंकी स्थिति ऐसी थी कि किसीके भी नेत्रोंमें अश्रु आ जाएं !
उल्लेखनीय है कि समाचार वाहिनीसे वार्तालापमें कानपुरकी महापौरने मन्दिर-‘मस्जिद’ विवादपर अपनी बात रखते हुए बताया था कि कैसे मुगल आक्रान्ताओंद्वारा मन्दिरोंको तोड डालनेका कार्य हुआ; परन्तु कभी किसीने ‘मस्जिदों’को नहीं छुआ । आज मन्दिरोंका निरीक्षण हो रहा है तो प्रत्येक पुरातन ‘मस्जिद’में से मन्दिर आ रहे हैं । उन्होंने हिन्दू मन्दिरोंके लिए चलाए जा रहे अपने प्रयासोंको लेकर कहा कि वे किसी पक्षसे कोई वस्तु नहीं मांग रहीं; किन्तु अपने मन्दिरोंके लिए कार्य कर रही हैं । यदि इससे किसीको कोई अप्रसन्नता है तो होती रहे ।
मन्दिरोंके अवशेषोंपर ‘मस्जिद’का होना यह बताता है कि हिन्दू बहुल देशमें हिन्दू शताब्दियोंसे पीडित रहें हैं । अब समय आ गया है कि हिन्दुओंको उनके पूजास्थल पुनः मिलें, जिससे हिन्दू स्वयंको गौरवान्वित अनुभव करें और अपनी संस्कृतिपर गर्व करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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