जम्मू-कश्मीरके पूर्व ‘पुलिस’ महानिदेशकका रहस्योद्घाटन, आरम्भमें ही पकडे गए ७० आतङ्कियोंको फारूक अब्दुल्लाने छोड दिया था


२० मार्च, २०२२
   चलचित्र ‘द कश्मीर फाइल्स’में १९९० के मुसलमानी जिहाद और कश्मीरी हिन्दुओंके नरसंहार एवं पलायनको दिखाया गया है । इस चलचित्रके तथ्योंपर चल रहे विवादके मध्य जम्मू-कश्मीरके पूर्व ‘पुलिस’ महानिदेशक शेषपॉल वैदने गुरुवार, १७ मार्च २०२२ को बडा रहस्योद्घाटन किया । वैदने देशमें आतङ्कवादके पनपनेके लिए १९८९ में केन्द्रकी कांग्रेस शासनको उत्तरदायी ठहराया है।
   ‘पुलिस’ महानिदेशक ‘एसपी’ वैदने ‘ट्विटर’के माध्यमसे कहा कि सम्भवतः बहुत ही अल्प लोगोंको ये ज्ञात होगा कि जम्मू-कश्मीर ‘पुलिस’ने पाकिस्तानकी गुप्तचर शाखा ‘आईएसआई’द्वारा प्रशिक्षित ७० आतङ्कियोंके पहले दलको बन्दी बना लिया था । पूर्व ‘पुलिस’ अधिकारीने ‘सनसनीखेज’ रहस्योद्घाटनमें कहा कि फारूक अब्दुल्लाके नेतृत्ववाली तत्कालीन जम्मू-कश्मीर शासनके राजनीतिक निर्णयके कारण उन्हें छोडना पडा था । कुछ समय पश्चात इन आतङ्कियोंने राज्यमें कई आतङ्की संगठनोंका नेतृत्व किया ।
   राज्यके पूर्व ‘पुलिस’ महानिदेशक शेषपॉल वैदने उन आतङ्कवादियोंके नामोंका भी रहस्योद्घाटन किया, जिन्हें फारूक अब्दुल्ला शासनने छोड दिया था और कुछ समय पश्चात इन्हीं आतङ्कियोंने घाटीमें कई आतङ्की घटनाओंको घटित किया । विदित हो कि फारूक अब्दुल्ला १९८७ से १९९० तक जम्मू-कश्मीरके मुख्यमन्त्री थे । इसी मध्य घाटीमें धर्मान्ध जिहादियोंने हिन्दुओंका नरसंहार किया था ।
   इसके अतिरिक्त उस मध्य केन्द्रमें राजीव गांधीके नेतृत्ववाले कांग्रेस शासनपर उंगली उठाते हुए पूर्व ‘पुलिस’ महानिदेशकने प्रश्न किया, क्या यह १९८९ के केन्द्र शासनके संज्ञानके बिना सम्भव था ?
   हिन्दुओंके विरुद्ध गढे गए झूठके कारण १९९० में हिन्दुओंके विरुद्ध अत्याचार बढे, जो कुछ समय उपरान्त इस समुदायके नरसंहारकी सीमातक पहुंच गया था । इसका परिणाम यह हुआ कि घाटीमें ‘मदरसा’ समर्थित कट्टरपन्थी धर्मान्ध जिहादियोंने कई लक्ष कश्मीरी हिन्दुओंको घाटी छोडनेपर विवश कर दिया था ।
       उत्तरदायित्वविहीन सत्तालोलुप राजनेताओंके सामने गिरगिट भी स्वयंको लज्जित महसूस करेगा । मोटी चमडीवाले इन राजनेताओंने देशके स्वाभिमान और स्वतन्त्रता दोनोंको ही संकटमें डाल दिया है । प्रतिदिनकी ये घटनाएं बताती हैं कि हिन्दू राष्ट्र कितना आवश्यक है ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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