आठ राज्योंमें ‘अल्पसंख्यक’ हुए हिन्दू, शासनने विवरण देनेसे मना किया !


जुलाई २३, २०१८

देशके ८ राज्योंमें हिन्दू ‘अल्पसंख्यक’ हो गए हैं !, लेकिन २०१९ के मतदानको देखते हुए केन्द्र शासन उन्हें ‘अल्पसंख्यक’ घोषित करनेमें भयभीत है । शासनने यह निर्धारित करनेका उत्तरदायित्व राज्य शासनपर डाल दिया है । वहीं, इन ८ राज्योंमें 5 राज्य ऐसे हैं, जहां पर भाजपा या भाजपा गठबन्धनका शासन हैं ! इनमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, मिजोरम, नागालैण्ड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप सम्मिलित हैं ।

आठ राज्योंमें हिन्दुओंको अल्पसंख्यकका दर्जा देनेमें अल्पसंख्यक मन्त्रालय काफी सावधानीसे चल रहा है । केन्द्रीय अल्पसंख्यक मन्त्री मुख्तार अब्बास नकवीने लोकसभामें एक प्रश्नके उत्तरमें बताया कि कुछ संगठनों और संस्थानोंसे हिन्दुओंको ‘अल्पसंख्यक’ नामांकित करनेका अनुरोध मिला है ।

नकवीके अनुसार केन्द्र शासन राष्ट्रीय स्तरपर किसी समुदायको अल्पसंख्यकके रूपमें अधिसूचित करती है, जबकि किसी राज्यमें किसी समुदायको अल्पसंख्यकके रूपमें घोषित करनेका प्रकरण राज्यके क्षेत्राधिकारमें आता है ।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोगके अधिकारी गैरुल हसन रिजवीका आठ राज्योंके अल्पसंख्यक हिन्दुओंको लेकर कहना है कि इसके लिए इन राज्योंको प्रस्ताव भेजना होगा । रिजवीने इसकी तुलना कर्नाटकके लिंगायतोंसे की है । उन्होंने कहा कि जिस प्रकारसे कर्नाटक राज्य शासनने लिंगायतोंको भिन्न अल्पसंख्यक धर्मके रूपमेंं नामांकित करनेको कहा था, वही सही मार्ग है । इस प्रकारका प्रस्ताव आनेपर ही केन्द्र शासन इसे स्वीकार अथवा निरस्त कर सकती है ।

रिजवीने बताया कि उच्चतम न्यायालयके अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायने ८ नवम्बरको इस सन्दर्भमें एक याचिका दी थी । उपाध्यायके प्रस्तुतिकरणके पश्चात जनवरी २०१८ में इस प्रकरणमें तीन सदस्योंकी एक उप-समिति गठितकी गई है । जॉर्ज कुरियनकी अध्यक्षतामें इस समितिमें महाराष्ट्रसे सुलेखा कुमबारे और पंजाबसे मंजीत सिंह राईको सम्मिलित किया गया है । इस समितिके विवरण आनेके बाद आयोग इसमें आगेकी कार्यवाही करेगा ।

८ राज्योंमें हिन्दुओंको ‘अल्पसंख्यक’का दर्जा देनेको लेकर उच्चतम न्यायालयके अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायने ८ नवम्बरको एक याचिका दी । इसकी सुनवाई करते हुए उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग जानेका परामर्श दिया । उपाध्यायने न्यायालयके आदेशानुसार १३ नवम्बरको राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोगमें प्रस्तुतिकरण दिया । अभी तक यह प्रकरण आयोगमें भी विचार और तीन सदस्यीय समितिके विवरण प्रतीक्षाके स्तरपर ही है ।

आयोगके सूत्रोंके अनुसार ८ राज्योंमें हिन्दुओंको अल्पसंख्यकका दर्जा देनेको लेकर समिति एक अन्तरिम विवरण तैयार कर चुकी है; लेकिन आधिकारिक रूपसे इसे शासनके समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है । इस पर, आयोगके अधिकारी रिजवीका कहना है कि विवरणपर कार्य चल रहा है और इस वर्षके अन्त तक ही शासनको दिया जाएगा; लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह देरी कुछ विशेष कारणोंसे हो रही है ।

समझा जा रहा है कि २०१९ के मतदानसे पूर्व शासन इस प्रकरणपर अपने हाथ नहीं जलाना चाहती । वैसे भी इन आठ राज्योंमें से पांच राज्योंमें भाजपाके सहयोगका शासन है । भाजपा मुख्यालय सूत्रोंका कहना है कि इन राज्योंसे अल्पसंख्यक हिन्दुओंको उनके अधिकार दिलानेके लिए आवश्यक प्रस्ताव (अल्पसंख्यक दर्जा) भेजनेमें राज्यके मुख्यमन्त्री आनाकानी कर सकते हैं ।

उच्चतम न्यायालयमें इसकी लडाई लडने वाले अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायका कहना है कि न्यायालयकी 11 सदस्योंकी पीठने २००२ में पंजाबके मामलेमें दिशा-निर्देश निर्धारित किया था । न्यायालयने अल्पसंख्यक प्रकरणकी सुनवाई करते हुए ‘टीएमए पाई’ अभियोगमें अल्पसंख्यकपर ही प्रश्न किया था । न्यायालयने व्याख्या करते हुए अपने निर्णयमें कहा था कि देशमें राज्योंका विभाजन भाषाके आधारपर हुआ है, न कि धर्मके आधारपर; इसलिए राष्ट्रीय स्तरपर अल्पसंख्यकका नामांकन करनेके स्थानपर राज्य स्तरपर ही अल्पसंख्यक नामांकित किए जाए !

८ राज्योंमें कितनी है हिन्दुओंकी संख्या

उपाध्यायने अपनी याचिकामें कहा था कि ८ राज्यों, जम्मू-कश्मीरमें २८.४४ प्रतिशत, पंजाबमें ३८ प्रतिशत, मिजोरममें २.७५ प्रतिशत, नागालैण्डमें ८.७५ प्रतिशत, मेघालयमें ११.५३ प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेशमें २९.०४ प्रतिशत, मणिपुरमें ४१ ३९ प्रतिशत और केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीपमें २.७७ प्रतिशतके साथ हिन्दुओंकी जनसंख्या ५० प्रतिशतसे भी अल्प है !

स्रोत : अमर उजाला



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