जुलाई १७, २०१९
राजधानी देहलीके संगम विहारमें एक ८ वर्षीय बच्ची प्रतिदिन एक मुसलमान अध्यापकके घरमें अभ्यासवर्गके लिए (ट्यूशनके लिए) पढने जाती थी । बच्चीका परिवार आजकी कथित धर्मनिरपेक्ष विचारधाराको मानने वाला था तथा शिक्षामें धर्म आदि न देखनेकी बात कहता था । यही कारण था कि बच्चीके परिजन उसको मुसलमान महिला अध्यापकके पास पढनेके लिए भेजते थे ।
एक दिवस उस अध्यापिकाके ६० वर्षीय अब्बू इस्लामने बच्चीके साथ यौन शोषण किया !! इस्लाम कार पेंटरका कार्य करता है । सूचनाके अनुसार, शनिवार दोपहरको भी बच्ची पढने गई थी । बच्चीने घरका द्वार खटखटाया तो इस्लामने द्वार खोला । वह अपनी अध्यापिकाको खोज रही थी । उस समय सारा परिवार सो रहा था, जिसका इस्लामने लाभ उठाना चाहा । इस्लामने बच्चीको अनुचित ढंगसे बार-२ छुआ । बच्चीने यह कृत्य करनेसे मना किया; परन्तु इस्लाम भयभीत नहीं हुआ ।
इसके पश्चात बच्ची इस्लामके चंगुलसे छूटकर अपने घर भाग आई । भयभीत बच्चीने अपने घर आकर अपनी मांको सारी बात बताई । अभिभावक तुरंत आरोपीके घर पहुंच गए । वहां उन लोगोंसे उसकी पत्नीने क्षमा मांगते हुए इस प्रकरणको समाप्त करनेके बात कही; परन्तु बच्ची नहीं मानी तथा पुलिसमें परिवाद करनेकी बात कही । बच्चीकी बात मानते हुए परिवारने तुरंत पुलिसको इसकी जानकारी दी । परिवादके आधारपर पुलिसने कार्यवाही करते हुए इस्लामको बन्दी बना लिया ।
“इतने प्रकरण होनेपर भी धर्मनिरपेक्ष मूढ हिन्दू अपनी बच्चियोंको धर्मान्धोंके पास भेजते है । इसके पश्चात होनेवाले प्रकरणके लिए केवल और केवल हिन्दू ही उत्तरदायी हैं ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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