केरल शास्त्र साहित्य परिषदने गोविज्ञानको बताया अन्धविश्वास


२३ फरवरी, २०२१
       राष्ट्रीय कामधेनु आयोगका गठन केन्द्र शासनद्वारा २०१९ को किया गया । यह संस्था मत्स्य, पशुपालन एवं ‘डेयरी’ विभाग मन्त्रालयके अन्तर्गत आती है । इसका उद्देश्य गोसंरक्षण, सुरक्षा तथा विकास है ।
          ‘आरकेए’ने ५ जनवरी २०२१ को एक परीक्षाकी घोषणा की, जिसके अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति गो सम्बन्धी ज्ञान वृद्धि करनेके उद्देश्यसे यह परीक्षा दे सकता है । विश्वविद्यालय अनुदान आयोगने इसके लिए सब राज्योंमें पाठ्यक्रम भी वितरित किया । केरल शास्त्र साहित्य परिषदने ‘यूजीसी’की इसपर आलोचना की है । ‘केएसएसपी’ने  केन्द्रपर आरोप लगाते हुए इसे अकादमिक भगवाकरण बताया । उन्होंने पाठ्यक्रमको अवैज्ञानिक बताते हुए कहा कि इसमें लिखा है कि गायका दूध पीलापन लिए होता है, कारण इसमें सुवर्णकी मात्रा होती है । इसमें लिखा है कि परमाणु ‘रेडिएशन’से गोदुग्ध रक्षण करता है । भोपाल ‘गैस’काण्डमें गोबरसे बने घरोंमें निवास करनेवाले जीवित बच गए । गोमूत्रसे कुष्ठ रोग तथा क्षय रोग ठीक होते हैं । ‘केएसएसपी’ने इन सभी बातोंको तर्कहीन तथा अवैज्ञानिक बताया ।
      उल्लेखनीय है कि यह परीक्षा २५ फरवरी २०२१ को होनी थी । वर्तमानमें इसे निरस्त किया गया है । इसके लिए ५ लाख विद्यार्थियोंने पंजीकरण करवाया है ।
      ‘कोरोना वायरस’से बचाव हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर गो उत्पादोंपर शोध हो रहा है । ऐसेमें गोउत्पादोंको अस्वीकार कर देना अनुचित है । यह केवल हिन्दू संस्कृतिसे घृणाके कारण ऐसा कर रहे हैं, जो सबको समझमें आ रहा है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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