बेंगलुरु उपद्रवके लिए चुना था कृष्ण जन्माष्टमीका दिन, ‘एसडीपीआई’ने रचा था साम्प्रदायिक सद्भाव हननका षड्यन्त्र


२५ फरवरी, २०२१
   राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरणने बेंगलुरुके विशेष न्यायालयमें एक आरोप-पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें १२ अगस्तकी हिंसाको ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इण्डिया (एसडीपीआई)’पर इस उपद्रवके षडयन्त्रको रचनेका आरोप लगाया है ।
          ११ अगस्तको ३००० से अधिकके जनसमूहने कांग्रेस विधायक आर अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति तथा उनकी बहनके निवास तथा डी.जे. हल्ली व के.जी. हल्ली पुलिस थानोंको जलाया था । जनसमूहके क्रोधका कारण विधायकके भतीजे नवीनद्वारा की गई भडकाऊ ‘पोस्ट’ बताया था ।
     ‘एनआईए’ने आरोप पत्रमें लिखा है कि उपद्रवका वास्तविक कारण अनुच्छेद ३७० हटाने, ‘CAA’ व ‘NRC’ तथा अयोध्यापर सर्वोच्च न्यायालयका न्याय जैसे कारणोंसे शासनका विरोध करना था । ‘एसडीपीआई’के फिरोज पाशा (मुख्य अभियुक्त), मोहम्मद शरीफ, मुजम्मिल पाशा सहित कुछ नेताओंने फिरोज पाशाके ‘फेसबुक’ खातेसे हिन्दू देवताओंके प्रति अपमानजनक टिप्पणियांकर हिन्दू समुदायको भडकाया । इसके लिए उन्होंने कृष्णजन्माष्टमीका दिन चुना । ऐसे ‘पोस्ट’ देखकर प्रवीणने क्रोधित होकर पैगम्बर मोहम्मदके विरुद्ध प्रतिक्रिया दी । उकसानेमें सफल हुए फिरोज पाशाने नवीनके विरुद्ध पुलिस व शासनसे तत्काल कार्यवाही करनेका दबाव बनाया । उसने रात्रिमें नवीन व मूर्तिके निवास तथा निकटके दो पुलिस थानोंपर आक्रमण करने जनसमूहको उकसाकर भेजा ।
         सारे उपद्रवका कारण नवीनको जानबूझकर उकसाना था । वास्तविक अपराधी पुलिसकर्मियोंद्वारा बन्दी बनाए गए हैं, जिन्होंने बेंगलुरुमें साम्प्रदायिक सद्भाव हननके साथ तोडफोड व हिंसा की । उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी, राष्ट्रीय सम्पत्तिकी हानिकी भरपाई उन्हींसे करवाते हैं, जो तोडफोडमें लिप्त होते हैं । कर्नाटक शासनभी ऐसा करे तो भविष्यमें सार्वजनिक सम्पत्तिको हानि पहुंचानेका दुःसाहस जनसमूह नहीं करेगा ।  न्यायालय उन्हें कठोर दण्ड देगा, यही अपेक्षा है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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