न्यायालयके ‘कुरान’ वितरणके आदेशको ठुकरानेवाली ऋचा भारतीके पिताकी हत्या,मृत शरीरको कुएंमें फेंका
२८ फरवरी, २०२१
झारखंड स्थित रांचीकी ऋचा भारतीका नाम तब प्रकाशमें आया था, जब उन्होंने न्यायालयद्वारा कुरान वितरणके दिए गए आदेशको ठुकरा दिया था । अब १९ फरवरीको रात्रि ८:३० बजे बिहारके नालंदामें ऋचा भारतीके पैतृक गांवमें उनके पिता प्रकाश बनाम मोहन कुमारकी गोली मारकर हत्याकर दी गई है ।
ऋचा भारतीके परिवारद्वारा प्रविष्ट परिवाद अनुसार, वो अपने खेतके पास ही थे, कि तभी ८ लोगोंने कन्धोंपर ‘रायफल’ रखकर उन्हें घेर लिया और ‘फायरिंग’ करने लगे । चंद्रमौली प्रसाद और रंजीत कुमार नामक ‘गुंडों’ने रक्तरंजित मोहन कुमारके गलेमें फन्दा लगाया और उन्हें घसीटते हुए पासके कुएंमें फेंक दिया । इसी मध्य वहीं पुलिस भी पहुंच गई । ऋचाकी मांके अनुसार, व्यक्तिगत शत्रुतामें ये हत्या हुई है।
ऋचाने आरोप लगाया है कि अबतक पुलिसने इस विषयमें किसीको भी नहीं पकडा । ऋचा भारतीकी सुरक्षाको लेकर रांचीमें भी प्रश्न उठने व झारखंड पुलिसद्वारा प्रताडित करनेपर भाजपा सांसद संजय सेठने भी परिवारसे बात करके सहायताका आश्वासन दिया था । ऋचाने पुलिसको बताया था कि उनके घरके समक्ष मुसलमान युवक थूककर चले जाते हैं और चिल्लाते हुए कहते हैं, “कुरानके अपमानका प्रतिशोध, ऋचा भारती हम तुमसे लेकर रहेंगे ।”
न्यायालयके एक निराधार निर्णयके कारण एक परिवारको इतना सब सहना पड रहा है, इससे समझमें आता है कि पुस्तकें पढकर रटकर न्यायाधीश बनना सरल है; परन्तु विवेक व योग्य न्याय देखनेकी वृत्ति सबमें हो, यह आवश्यक नहीं ! क्या न्यायाधीश महोदय इस सबका भार अपने सिर लेंगे ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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