पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशीने बताया इस्लामको परिवार नियोजनका समर्थक, कहा कुरानकी आयतें करती है सीमित परिवारका अनुगमन
२८ फरवरी, २०२१
भारतके पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशीने अपनी नवीन पुस्तक ‘द पॉपुलेशन मिथ्य : इस्लाम फैमिली प्लैनिंग एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया’में धार्मिक आधारपर भारतकी जनसंख्याका विश्लेषण किया है । वह अपनी इस पुस्तकके माध्यमसे इस मिथकको असत्य सिद्ध करना चाहते हैं कि इस्लाममें परिवार नियोजन निषेध है । समाचारपत्र ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ व ‘हिंदुस्तान टाइम्स’को अपना वक्तव्य देते हुए उन्होंने इस पुस्तकमें ‘कुरान’के अन्तर्गत इन तथ्योंको साझा करते हुए कहा कि इस्लामिक देशोंमें जनसंख्या नीति पू्र्वसे ही लागू है तथा इस्लाम परिवार नियोजनकी विचारधारामें अग्रणी हैं । उनके अनुसार, १४०० वर्ष पूर्वसे ही विश्वमें जनसंख्या वृद्धिपर दबाव नहीं था, तब कुरान उस समय भी परिवार नियोजनके विषयमें बता रहा था ।
उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्तने अपनी ‘सेकुलर’ छविके लिए प्रसिद्ध हैं; परन्तु कुछ समय पूर्व ही उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके लिए अप्रत्यक्ष रूपसे उनके ‘कोरोना’ महामारीसे संक्रमित होनेकी कामना करते हुए ‘ट्वीट’ किया था । वहीं आलोचना आरम्भ होनेके पश्चात ‘ट्वीट’ हटाकर क्षमा मांगी थी । उनका कहना था कि इस ‘पोस्ट’ हेतु उनका ‘बटन’ चूकवश दब गया था ।
मुसलमान अन्य धर्मियोंकी बात तो नहीं मानते, कमसे कम अपने सहधर्मीकी बात मान लें और परिवार सीमित रखें ! अन्यथा शासनको जनसंख्या नियन्त्रणके सम्बन्धमें कठोर विधान बनाना ही चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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