मां, माटी, मानुषके नामपर मत (वोट) और भाजपा कार्यकर्ताकी मां होना पीडिताका एकमात्र दोष
०१ मार्च, २०२१
शुक्रवार, २६ फरवरीकी रात्रि १:३० बजे पश्चिम बंगालके उतर दमदम नगर स्थित निमताके ‘वार्ड’ संख्या-६में भाजपा कार्यकर्ता गोपाल मजूमदार और उनकी मांपर बंदूकके पिछले भागका प्रयोग करतेहुए आक्रमणके समय इतना पीटा गया गया कि दोनोंके ‘चेहरे’ सहित शरीरके कई अंगोंपर गहरी चोटें आई है ।
निमता पुलिस थानेमें इस विषयमें प्राथमिकी सूचना प्रविष्ट की । और पीडित भाजपा कार्यकर्ताने तृणमूल कांग्रेसके ३ ‘गुंडों’पर हिंसाका आरोप लगाया और बताया कि तीनों घरमें घुसकर अपशब्दोंका प्रयोग आरम्भकर पूछने लगे कि भाजपामें उक्त कार्यकर्ताकी क्या भूमिका है ? पीडितने बताया, “मैं भाजपाका मण्डल सदस्य हूं ।” यह सुन उन्होंने पहले हाथोंद्वारा मुझे मारा, तत्पश्चात बंदूकके सिरेका प्रयोग करके मेरे सिरपर प्रहार किया । जब मैं भूमिपर गिर गया तो उन्होंने मुझे लात-घूसोंसे मारना आरम्भ कर दिया ।
एक स्थानीय व्यक्तिने बताया कि इस क्षेत्रमें ‘TMC’के आतंकका बोलबाला है और गोपाल मजूमदारके साथ उन्होंने अन्य भाजपा कार्यकर्ताओंपर भी आक्रमण किया है ।
मतदानकी दिनांक, दिवस इत्यादिकी सार्वजनिक घोषणा होनेके पश्चात आचार संहिताका उल्लंघन किया जा रहा है जो दण्डनीय अपराध भी है, जो उसी प्रकार चल रहा है, जैसे राज्य शासनके होनेपर था । अब ममता शासन केवल कार्यकारी शासन है, तब भी इनके व्यवहारमें कोई परिवर्तन नहीं है ! इससे सिद्ध होता है कि सत्तामें रहते इन्होंने विरोधियोंपर कितने अत्याचार किए होंगे । हिन्दुओ ! अभी समय है अपने मतकी शक्तिसे इस अत्याचारके कम करनेका, अन्यथा बंगालकी दुर्दशा कोई रोक नहीं पाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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