साधको, यदि आपसे शारीरिक श्रम अधिक नहीं होता है तो श्वेत शर्करा, तले हुए पदार्थ और आहार भी थोडा कम लें ! साधना हेतु शरीरका हलका रहना अति आवश्यक है । अपने शरीरके भारपर सदैव ध्यान देना चाहिए; क्योंकि स्थूल और जड देहसे अधिक सेवा नहीं हो सकती है । मोटापा अनेक रोगोंका कारण बन जाता है और स्फूर्ति भी घट जाती है ।
अब इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरा ध्यान स्थूल देहकी ओर ही देना है; किन्तु साधनाका माध्यम हमारी यह स्थूल देह है; इसलिए इसका स्वस्थ होना अति आवश्यक है ।
अपनी दिनचर्यामें, अपनी आयु अनुसार थोडा शारीरिक श्रम अवश्य सम्मिलित करें !
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