नरवालकी मस्जिदमें मौलवी बनकर निवास कर रहा था रोहिंग्या, उन्नाव और नोएडासे भी बनाए गए बन्दी


०२ मार्च, २०२१
       उत्तर प्रदेश आतङ्कवाद विरोधी दलने (यूपीएटीएसने) मार्च २०२१ को उन्नाव तथा नोएडासे दो रोहिंग्या बन्दी बनाए हैं । नोएडासे मोहम्मद फारुख वास्तविक नाम हसन अहमद है, जो म्यांमारके आकियाब जनपदका निवासी है । उन्नावसे शाहिदको बन्दी बनाया है, जो हसन अहमदका सगा भाई है । इनसे पूछताछ करनेपर ज्ञात हुआ कि इनकी मां तथा बहन अलीगढमें रहती हैं । इनसे ५ लाख रुपये तथा अनेक छद्म भारतीय
प्रपत्र प्राप्त हुए हैं । ये रोहिंग्याओंको भारतमें अवैध प्रवेश करवाते थे । उनका संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालयमें पंजीकरण करवाकर भिन्न-भिन्न नगरोंमें उनकी निवासकी तथा चाकरीकी भी व्यवस्था करवाते थे । इसके लिए उनके छद्म परिचय-पत्र जैसे ‘आधार कार्ड’ आदि बनवाते थे । ‘एटीएस’को इनके देश विरोधी गतिविधियोंमें संलिप्त होनेके प्रमाण प्राप्त हुए हैं, जिन्हें अवैध प्रवेश दिलवाया ऐसे १६०० रोहिंग्याओंको चिह्नित किया गया है, जिन्हें ढूंढा जा रहा है । ज्ञात हुआ है कि आरोपियोंका बहनोई हुसैन अहमद परिवार सहित हरियाणाके नूहमें रहता है । वह अपने भाई शाहिदके साथ मिलकर रोहिंग्याओंको बांग्लादेशकी सीमासे भारतमें प्रवेश करवाता था ।
           जम्मू-कश्मीरसे भी दो रोहिंग्या बन्दी बनाए गए हैं । इनमेंसे एक मस्जिदमें मौलवी बनकर रहता था । मौलवी अब्दुल गफूर तथा उसके साथी आशिक उर रहमानको जो बठिंडी मोडमें निवास कर रहा था, त्रिकुटा नगर पुलिसने बन्दी बना लिया है ।
उनके पास कुछ धार्मिक प्रपत्र भी प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है ।
         म्यांमारसे निर्वासित रोहिंग्या भारतमें प्रवेशकर देशमें सर्वत्र बस गए हैं । ये आतङ्कवादी गतिविधियोंमें लिप्त पाए जाते हैं । मात्र १६००  नहीं, वरन लाखों रोहिंग्या सपरिवार भारतके अनेक प्रदेशोंमें अवैध निवास कर रहे हैं, जिन्हें ढूंढना एक कठिन कार्य है; क्योंकि शासकगण कृतिशील नहीं हैं । यदि शासन तीव्रता दिखाए तो यह अवश्य ही सम्भव है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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