मुगलों-औरंगजेबने करवाया मन्दिरोंका जीर्णोद्धार, ‘NCERT’ देशको पढा रहा बिना साक्ष्यके
०४ मार्च, २०२१
पुस्तकोंमें मुगलोंका महिमामण्डन करनेवाली ‘NCERT’को (नेशनल काउंसिल ऑफ एड्यूकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) भरतपुरके एक ‘आरटीआई’ कार्यकर्ताने वैधानिक पत्र भेजा है । ‘NCERT’को यह पत्र मुगलोंपर अप्रमाणित तथ्य प्रकाशित करनेको लेकर भेजा गया है ।
यद्यपि ‘NCERT’की कक्षा-१२ की इतिहासकी पुस्तकमें यह प्रमाणित किया गया है कि जब हिन्दू मन्दिरोंको युद्धके मध्य नष्ट कर दिया गया था, तब उनके जीर्णोद्धारके लिए शाहजहां और औरंगजेबद्वारा अनुदान प्रदान किए गए । अब इसी प्रमाणको लेकर भरतपुरके कार्यकर्ता दपिंदर सिंहने ‘एनसीईआरटी’के विरुद्ध यह पग उठाया है । इससे पूर्व उन्होंने एक ‘RTI’ लगाई थी, जिसमें उन्होंने प्रश्न किया था कि कक्षा १२वींकी इतिहासकी पुस्तकमें जो प्रमाण दिए गए हैं, उसके स्रोत और उसके पीछेके तथ्य क्या हैं ? जिनके आधारपर यह पढाया जा रहा है ?
इस ‘आरटीआई’के उत्तरमें जब ‘NCERT’ने सन्तोषजनक उत्तर नहीं दिया और कहा कि उनके पास इसका कोई सन्दर्भ उपस्थित नहीं है, तो दपिंदर सिंहने उन्हें यह सूचना भेजी । उनका मत है कि क्यों यह अनुचित इतिहास बच्चोंको पढाया जा रहा है ? क्यों स्पष्ट रूपसे केवल बच्चोंको प्रत्यक्ष रूपसे भ्रमित करनेका कार्य हो रहा है ? वरन उनके साथ भी खिलवाड हो रहा है, जो किसी प्रवेश परीक्षाकी ‘तैयारी’ कर रहे हैं ।
इसपर एक ‘एक्टिविस्ट’ संजीव वकील कहते हैं कि छात्रोंको कल्पना आधारित इतिहास पढाया जा रहा है । वह कहते हैं, “शिक्षाके आधारसे ‘NCERT’की पुस्तकोंको प्रमाणित पुस्तक समझा जाता है । इन्हें ‘सिविल परीक्षा’की ‘तैयारी’ करनेवाले भी पढते हैं और अन्य परीक्षाकी ‘तैयारी’ करनेवाले भी । आगामी पीढीको अनुचित दिशामें अग्रसर किया जा रहा है और इसके परिणाम बहुत भयानक हो सकते हैं ।”
‘NCERT’ बिना प्रमाण और साक्ष्यके विद्यार्थियोंके पुस्तकोंमें अनुचित और अप्रामाणिक इतिहास प्रेषित कर रहा है; इससे स्पष्ट है कि हमारा शिक्षा मन्त्रालय क्या कर रहा है ? आजकी शिक्षा युवा पीढीका सर्वनाश कर रही है । यह न हो, इस हेतु शीघ्रातिशीघ्र हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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