स्वस्थ रहने हेतु जलसे सम्बन्धित कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्योंका अवश्य करें पालन (भाग-अ)
शरीरमें होनेवाले अनेक रोगोंका मूल कारण, पाचन क्रियाका सुचारू रूपसे कार्य न करना होता है । अर्थात यदि रोगोंसे बचना है तो भोजनका सुचारू रूपसे समयसे पचना आवश्यक है और भोजनकी पाचन क्रिया, योग्य रीतिसे योग्य समयपर और योग्य मात्रामें पानी पीनेसे होती है ।
प्रशीतक अर्थात फ्रिजका पानीके स्थानपर सामान्य तापमानवाला या मटकेका जल पीना स्वास्थ्यके लिए अधिक श्रेयष्कर होता है । अति शीतल जल पीनेसे जठराग्नि बुझ जाती है, जिससे शरीरमें भोजन सडने लगता है; इसलिए स्वस्थ शरीरकी इच्छा रखनेवालोंको अति शीतल जल कभी नहीं पीना चाहिए ।
‘गर्म’ भोजन, फल, वसायुक्त (चिकना) या तला हुआ भोजन खानेके पश्चात, मूंगफली, ‘गर्म’ दूध व चाय और धूपसे आनेके पश्चात त्वरित जल पीना भी स्वास्थ्यके लिए हानिकारक होता है ।
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