स्वस्थ रहने हेतु कुछ महत्त्वपूर्ण सूत्र (भाग-१३)


उष्ण (गर्म) जलकी अपेक्षा शीतल जलसे स्नान करना अधिक हितकारी क्यों होता है ? (भाग-अ)

शीतऋतुमें गुनगुना जल होना चाहिए । शीतल जलसे शिथिलता आती है । उष्ण जलसे त्वचा शुष्क हो जाती है । प्रतिदिन शीतल जलसे स्नान करनेसे शरीरकी स्वच्छता हो जाती है ।
कई अध्ययनोंसे ज्ञात हुआ है कि प्रतिदिन शीतल जलसे स्नान करना अर्थात ‘कोल्ड शावर’ लेना स्वास्थ्यके लिए उत्तम होता है । ठण्डे जलसे स्नान करनेसे स्वस्थ्यमें कई सुधार हो सकते हैं ।
इनमें कुछ मुख्य लाभ है जैसे : रक्त संचार उत्तम होना, तनाव न्यून होना, उत्साह और स्फूर्तिमें वृद्धि होना आदि ।
इस प्रवृत्तिसे तनाव और चिन्ता न्यून होती है, साथ ही व्यायामके पश्चात मांसपेशियोंको सुधारनेका प्रकरण हो या वसाको न्यून करनेकी बात हो या पुनश्च प्रतिरक्षा प्रणालीको उत्कृष्ट बनाना, इन सबमें लाभ मिलता है ।
यह तो स्पष्ट है कि शीतल जलके सम्पर्कमें हमारी त्वचाके आनेपर शरीरको झनझनाहट-सी होती है और शरीर तनावमें उसपर बहुत तीव्रतासे प्रतिक्रिया करता है, जो हृदयकी धडकन और रक्तसंचारको बढाता है । दूसरी ओर घरेलू स्तरपर भी शीतल जलसे स्नान करना बहुत ही सुरक्षित माना जाता है । कंपकंपीके अतिरिक्त इसका और कोई विपरित प्रभाव नहीं पडता, जो शरीरको हानि पहुंचाए ।
शीतल जलसे स्नान करनेपर शरीरके हानिकारक रसायन और ‘हार्मोंन’ शरीरेसे बाहर निकल जाते हैं, जिससे व्यक्ति स्वयंको तनावरहित अनुभव करता है । शीतल जलसे आप उन परिस्थितियोंसे सङ्घर्ष करनेकी विधि परिवर्तित कर सकते हैं जिनसे आप भयभीत हैं और आप असहज अनुभव करते हैं । दूसरी ओर एक और तर्क दिया जाता है कि शीतल जलसे स्नान करनेवालोंके मस्तिष्कपर अचानक एक झटका-सा लगता है, जो एक अवसादरोधी प्रभाव हो सकता है ।



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