किसान आन्दोलन राजनीतिक, जिसका उद्देश्य मोदीको हराना, आन्दोलनकारी योगेंद्र यादवने स्वीकारा सत्य


०५ मार्च, २०२१
तथाकथित किसान आन्दोलनकारियोंका विरोध गत ४ माहसे चल रहा है, जो केन्द्र शासनद्वारा पारित ३ विधेयकके विरुद्ध सुनियोजित रूपसे आयोजित किया जा रहा है । किसान आन्दोलनमें विरोधके नामपर राजनीतिक दल कांग्रेस, ‘कम्युनिस्ट संगठन’ खालिस्तानी एवं अन्य असामाजिक तत्त्वोंकी सहभागिता भी देखनेको मिल रही है । अब इसी अन्तर्गत योगेंद्र यादव, जो प्रत्येक आन्दोलनमें प्रदर्शनकारी राजनेताके रूप में स्वयंको प्रस्तुत करते हैं, उन्होंने स्पष्ट स्वीकार किया है कि किसानोंका यह विरोध वास्तवमें राजनीतिक है, जिसका उद्देश्य मात्र मोदी शासनको सत्तासे हटाना है । ‘द प्रिंट’में प्रकाशित अपने एक लेखके माध्यमसे योगेन्द्र यादवने कहा है कि किसानोंका आन्दोलन अराजनीतिक नहीं हो सकता एवं होना भी नहीं चाहिए; क्योंकि ऐसा करना लोकतान्त्रिक नहीं है । योगेंद्र यादवने संयुक्त किसान मोर्चाके निर्णयकी बात करते हुए लेखमें यह भी कहा कि हम अब चुनावी राज्योंमें जाकर बीजेपीके विरुद्ध प्रचार करनेकी नीति बना रहे हैं, जिसके अनतर्गत हम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु व पुडुचेरीमें मतदाताओंसे निवेदन करेंगे कि वे किसान विरोधी विधायकोंको पारित करनेवाली भारतीय जनता पार्टीके पक्षमें आनेवाले चुनावोंमें मतदान न करें ! योगेंद्र यादवने यह भी कहा कि किसानोंका राजनीतिकरण मात्र उचित उद्देश्यके लिए किया जा रहा है । इससे आन्दोलन लेशमात्र भी कलङ्कित नहीं होगा । उल्लेखनीय है कि योगेंद्र यादव स्वराज अभियान नामक एक राजनीतिक दलभी चलाते हैं तथा वहीं अन्य आन्दोलनमें सक्रिय अनेक किसान नेता भी कांग्रेस व अन्य ‘कम्युनिस्ट दलों’से जुडे हुए हैं ।
        नित्य प्रसारित होते समाचार किसान आन्दोलनके उद्देश्यको अब सभीके सन्मुख साक्ष्यके साथ प्रस्तुत कर रहे हैं; परन्तु वहीं केन्द्र शासनद्वारा आन्दोलनको समाप्त करने हेतु कोई भी उचित प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं । अब आनेवाले कालमें यह आन्दोलन क्या रूप लेगा, यह केवल समय ही बता सकता है; परन्तु निश्चित ही यह देशहितमें नहीं होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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