मुकेश अंबानीके घरके बाहर विस्फोटक भरी ‘कार’के स्वामीका मिला शव, आतङ्की षड्यन्त्रकी आशङ्का
०६ मार्च, २०२१
अंबानीकी अट्टालिकाके निकट खडी ‘स्कोर्पियो’ मनसुख हिररेनकी थी । १६ फरवरीकी रात्रिको उनकी गाडी बन्द हो गई, तो वे उसे मार्गके एक ओर लगाकर ‘कैब’से घर गए । जब वे दूसरे दिन गाडी लेने उसी स्थानपर आए, तो गाडी वहां नहीं थी । उन्होंने पुलिस थानेमें गाडी लुप्त होनेकी ‘रिपोर्ट’ लिखवाई थी । यही वह गाडी थी, जो अंबानीके घरके बाहर विस्फोटकोंसे भरी पाई गई थी । जिस व्यक्तिने गाडी लुप्त होनेका परिवाद किया, उसके तथा मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजेके मध्य भ्रमणभाषसे अनेक बार वार्तालाप हुए हैं । इन दोनोंमें प्रथम वार्तालाप ८ जून उसके पश्चात २४ जुलाईको हुआ । उसके पश्चात दोनोंके मध्य अनेक वार्तालाप हुआ है ।
मुकेश अंबानीके घरके पास ठाणेकी ओरसे दो गाडियां आई थीं । एक ‘स्कोर्पियो’ वहीं खडी की गई तथा दूसरी ‘इनोवा’ आगे निकल गई । यह भी अचरजका विषय है कि सचिन वाजे वह व्यक्ति थे, जो सर्वप्रथम घटना स्थलपर पहुंचे थे और उन्हें ही जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था । तीन दिन पूर्व उन्हें अकस्मात जांच अधिकारी पदसे हटा दिया गया ।
देवेंद्र फडणवीसने इन सभी घटनाओंको गम्भीर और सन्देहास्पद बताया है । अंबानीके घरके सामने पाई गई ‘स्कोर्पियो’ २४ फरवरीकी रात्रिको १२:३० बजे हाजी अली गई थी । वहां १० मिनिट रुकी भी थी ।
देवेंद्र फडणवीसने पूछा कि मनसुख हिरेनको पुलिस सुरक्षा क्यों नहीं दी गई ? उन्होंने कहा कि ठाणेसे ‘कार’ चोरी होना, उसी मार्गसे दोनों गाडियोंका अंबानीकी अट्टालिकातक आना संयोग नहीं हो सकता । मनसुख हिरेनका शव कलावा ‘ब्रिज’के निकट नालेमें मिला है । पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है ।
किसीकी विस्फोटकसे भरी गाडी एक धमकीयुक्त पत्रके साथ अंबानीकी अट्टालिकाके बाहर मिलना उसके मालिकका एक पुलिस अधिकारीसे अनेक बार भ्रमणभाषपर वार्तालाप, तदनन्तर उसकी सन्देहास्पद मृत्यु ये सब किसी गम्भीर षड्यन्त्रकी ओर संकेत करते हैं । पूर्व मुख्यमन्त्री फडणवीस ‘एनआईए’द्वारा जांचकी इच्छा प्रकट कर रहे हैं । यह उचित है; क्योंकि यह कोई आतङ्की षड्यन्त्र लग रहा है । केन्द्र इसमें त्वरित कठोरतासे हस्तक्षेप करे; क्योंकि उद्धव शासनसे कार्यवाहीकी अपेक्षा व्यर्थ है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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