चिकित्सालयने कटे हुए पेटसे बच्चीको निकाल दिया, मांगे गए पांच लाख रुपये
०८ मार्च, २०२१
उत्तर प्रदेशके प्रयागराजमें तीन वर्षीय बच्चीको प्राण त्यागने पडे । बच्चीको उदर पीडाके कारण चिकित्सालयमें ले जाया गया, जहां चिकित्सकोंने उसकी शल्य क्रियाके मध्य पांच लाख रुपये मांगे । रुपये नहीं मिलनेपर चिकित्सकोंने उसके उदरको टांके लगाए बिना ही उसे परिजनको सौंप दिया । दूसरे चिकित्सालय ‘चिल्ड्रन होम’ने भी बिना टांके लगे हुए एवं कटे हुए पेटको देखकर, उसे प्रविष्ट करनेसे मना कर दिया । परिजन बच्चीको पुनः पहलेवाले चिकित्सालयमें ले आए; किन्तु उन्होंने रुपये नहीं मिलनेपर उपचार नहीं किया । अत्यधिक असहनीय पीडाके कारण बच्चीने प्राण त्याग दिए । आक्रोशित सम्बन्धियोंद्वारा कोलाहल करनेपर भी चिकित्सालयने द्वार नहीं खोले तो कई थानोंकी पुलिसको वहां आना पडा । मंझनपुरमें शव-निरीक्षण भी किया गया । जिलाधिकारीने चिकित्सालयके विरुद्ध कार्यवाही करनेका आश्वासन दिया है । बच्चीके पिताने बताया कि उक्त शल्यक्रियाके नामपर उससे डेढ लाख रुपये ऐंठ लिए गए तथा और भी पांच लाख रुपये मांगे गए । बाल संरक्षण आयोगने ‘डीएम’से इसका लिखित विवरण मांगा है और चिकित्सालय तथा चिकित्सकोंके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट करनेके लिए कहा है ।
चिकित्सकोंका धर्म रोगीको स्वस्थ्य करना होता है, न कि धन ऐंठना । धनके प्रलोभनमें अमानवीय आचरण करनेवालोंके विरुद्ध कडी कार्यवाही होनी ही चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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