“सफूरा जरगरके बन्दी बनाए जानेपर मानवाधिकारका उल्लंघन, उसके विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं” : ‘यूएन’की संस्था
१६ मार्च, २०२१
सफूरा जरगरपर ‘आर्म्स एक्ट’ और सार्वजनिक सम्पत्तिको क्षति पहुंचानेकी धाराओंके अन्तर्गत आरोप हैं; परन्तु संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषदके ‘डब्ल्यूजीएडी’ने कहा कि उसके विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं है ।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषदके ‘वर्किंग ग्रुप अगेंस्ट अर्बीट्री डिटेंशन्स’ने तथाकथित छात्र नेता सफूरा जरगरकी बन्दी और कारावास भेजे जानेके प्रकरणमें टिप्पणी की है । सफूरा जरगरपर देहलीमें ‘सीएए’ विरोधी आन्दोलनके बहाने हिंसाका षड्यन्त्र रचनेके आरोप हैं ।
सयुंक्त राष्ट्रकी अनेक संस्थाए पूर्वाग्रहसे ग्रसित होकर कार्य करती हैं एवं कुछ संस्थाओंके प्रमुख पदोंपर वामपन्थी विचारधाराके लोग बैठे हुए हैं । सयुंक्त राष्ट्रके पांचों स्थाई सदस्य स्वयंके एवं अपने मित्र राष्ट्रोंके वैश्विक हितोंके लाभ और हानिके अनुसारही निर्णय होने देते है; इसलिए अधिकतर समय उनका धरातलकी सत्यतासे कोई लेना-देना नहीं होता है । विश्वकी अनेक शक्तियोंका भारतके विरुद्ध एकत्रित होना, भारतके शक्तिशाली होनेका संकेत है; अतः भारतको ऐसे वक्तव्योंकी उपेक्षा करना चाहिए और शक्ति संचय करते रहना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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