“सद्दाम और गद्दाफी भी चुनावमें विजयी हुए थे, ‘आरएसएस’की विचारधारा ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’के समान” : राहुल गांधी 


१८ मार्च, २०२१
 राहुल गांधीने ब्राउन विश्वविद्यालयके प्राध्यापक आशुतोष वार्ष्णेयको दिए गए साक्षात्कारमें कहा कि सद्दाम हुसैन और गद्दाफीको चुनावमें विजय प्राप्त करनेके लिए जनमतकी आवश्यकता नहीं थी, उन्होंने सत्ता प्राप्त करनेके लिए चुनाव प्रक्रियाका मात्र उपयोग किया था ।
 पिछले दिनों जब ‘वी-डेम इंस्टिट्यूटने भारतके लोकतन्त्रको निकृष्ट बताया था, तो राहुल गांधीने उसका समर्थन किया था । इसीलिए ब्राउन विश्विद्यालयके प्राध्यापकने उनके इस टिप्पणीपर प्रश्न किए थे, जिसके उत्तरमें उन्होंने गद्दाफी और सद्दामका उदाहरण दिया ।
 जबकि गद्दाफी १९६९ में सैन्य क्रान्तिके उपरान्त सत्तामें आया था तब कोई चुनाव प्रक्रिया नहीं हुई थी । सद्दाम हुसैन भी २००३ में बन्दी बनाया गया था तथा उसे मानवता विरुद्ध अपराधी सिद्धकर अमरीकी सेनाने फांसी दी थी ।
 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघपर टिप्पणी करते राहुल गांधीने इस सङ्गठनकी तुलना मिस्रके ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’सेकी । उन्होंने ‘आरएसएस’ और शिशु मन्दिरोंको धनार्जनका साधन बताया । संसद सत्रमें बन्द हुए ‘माइक’की घटनाओंके उदाहरण प्रस्तुतकर राहुल गांधी कहते हैं कि भाजपाने चुनावी प्रक्रियाका दिखावाकर सत्ता प्राप्त की है । हास्यास्पद यह कि ५ लाख ‘आईटी सेल’ सदस्योंको चाकरीमें लेकर कांग्रेसके यह पूर्व अध्यक्ष आरोप लगाते हैं कि भारतमें ‘फेसबुक’का प्रमुख भाजपाई है ।
       यह प्रथम बार नहीं है । इससे पूर्व भी विदेशमें राहुल गांधी ‘आरएसएस’की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’से कर चुके हैं । ये उसी पक्षके पूर्व अध्यक्ष हैं, जिन्हें हिन्दू आतङ्की दिखाई देता है, जिन्हें अखलाक या तबरेजकी मृत्युपर दुःख होता है; परन्तु हिन्दुओंकी हत्याओंपर ये चुप रहते हैं । इनके हिन्दू होनेके ढोंग और इनके भ्रष्टाचारसे त्रस्त, हिन्दुओंने इन्हें पराजितकर सिंहासनसे उतार दिया है; तबसे ये बौखलाए हुए हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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