“वसीम रिजवी इस्लामका शत्रु” : जामा मस्जिदके बाहर एकत्रित हुए सहस्रों जन, कुरानकी आयत हटानेकी याचिकापर विरोध


२० मार्च, २०२१
     शिया वक्फ ‘बोर्ड’के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवीके विरुद्ध शुक्रवार १९ मार्च २०२१ को देहलीकी जामा मस्जिदके बाहर सहस्रोंकी सङ्ख्यामें जुटे प्रदर्शनकारियोंने ‘नारे’ लगाए । रिजवीको इस्लामका शत्रु बताया तथा उनको बन्दी बनाए जानेकी मांग की ।
      पिछले दिनों वसीम रिजवीने सर्वोच्च न्यायालयमें कुरानकी २६ आयतें हटानेके सम्बन्धमें याचिका प्रस्तुत की थी । उनका मत है कि इन २६ आयतोंमें कुछ आतङ्कवादको प्रोत्साहित करनेवाली आयतें हैं, तथा यह कुरानमें नहीं थीं; वरन इन्हें कालान्तरमें सम्मिलित किया गया है ।
      उनके इस कार्यसे मुसलमान समुदाय क्रोधित है । शिया उपदेशक मौलाना कल्बे जवाद इसे कुरानका अपमान बताकर वसीमके विरुद्ध कठोर कार्यवाहीका आग्रह कर रहे हैं ।
     प्रदर्शनकारियोंने कहा कि वसीम रिजवी शिया और सुन्नी समुदायमें क्लेशके इच्छुक हैं; परन्तु दोनों समुदाय मिलकर उनका विरोध कर रहे हैं । एक प्रदर्शनकारीने कहा कि ऐसे लोगोंका समाजसे बहिष्कार किया जाना चाहिए ।
       सामाजिक जालस्थानोंपर दृश्यपट भी दर्शाए गए हैं, जिनमें ‘अल्लाहू अकबर’ और ‘नारा ए तकबीर’ कहते हुए जन समुदाय उनके छायाचित्रको चप्पल मारते अथवा उनके मुखपर ‘क्रॉस’का चिह्न लगाकर उन्हें इस्लामका शत्रु बता रहे हैं ।
        इसके विपरीत वसीम रिजवीका कहना है कि वे अन्तिम सांसतक इस सुधार हेतु युद्ध करेंगे ।
     यह एक ऐसा समुदाय है जिसमें बाल्यकालसे ही इनकी मान्यताओंकी ऐसी घुट्टी पिलाई जाती है कि ये लोग अन्य धर्मोंके घोर विरोधी हो जाते हैं । ऐसेमें ये समुदाय सुधार सम्बन्धित कोई तर्क न सुनेगा न समझेगा । अतः वसीम रिजवीका विरोध धर्मान्ध मुसलमान कर रहे हैं । जबकि देखा जाए तो आज संसारमें एक भी मुसलमान ऐसा नहीं मिलेगा, जो कुरानके निर्देशोंका पूर्णतः पालन करता हो । अतः मुसलमानोंको वसीम रिजवीका विरोध न करते हुए, उनका समर्थन करना चाहिए और हिन्दुओंको वसीम रिजवीका साथ देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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