ननोंके यौन शोषण तथा ईसाइयों संग ‘लव’ जिहादपर राहुल गांधी चुप; परन्तु ईसाई ननोंसे पूछताछपर क्रोधित


२६ मार्च, २०२१
         झांसी ‘रेलवे स्टेशन’पर १९ मार्च २०२१को ४ ईसाई ननोंको रेलयानसे उतारकर पूछताछ की गई । शङ्का थी कि वे मानव तस्करीमें लिप्त हैं; परन्तु जब ज्ञात हुआ कि ऐसा नहीं है, तो उन्हें जाने दिया गया । इसपर राहुल गांधीने त्वरित राजनीति प्रारम्भ कर दी । उन्होंने २ ‘ट्वीट’ किए, जिनमें लिखा था कि उत्तर प्रदेशमें केरलकी ननोंपर घृणित आक्रमण यह संघ परिवारका कार्य है । कुछ समय पश्चात लिखा कि परिवारके समान संघमें महिलाओं, वयस्कोंके प्रति सम्मान, करुणा, स्नेह नहीं है; अतः मैं इसे अब संघ परिवार नहीं कहूंगा ।
    उल्लेखनीय है कि वे केरलसे सांसद हैं और वहां चुनाव हैं । भाजपाने केरल चुनावमें ‘लव जिहाद’ विरुद्ध विधान लानेका आश्वासन दिया है । केरलके वायनाडमें राहुल गांधी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’के संग हैं । तो वे ‘लव जिहाद’पर चुप हैं । वे स्वयंको ईसाई महिलाओंका हितैषी दर्शाते हैं; परन्तु फ्रेंको मुलक्कल सहित अन्य किसी भी यौन शोषणमें लिप्त पादरीके विरुद्ध कभी कोई ‘ट्वीट’ नहीं किया ।
       नेतागण समय, स्थान, जाति, धर्म अनुसार अपना रंग किसी गिरगिटकी भांति परिवर्तित करते हैं । राहुल गांधी इसमें अपवाद नहीं हैं । मानव तस्करीमें लिप्तताकी शङ्कापर पूछताछ उचित थी । इसपर शासनपर प्रश्न उठाना ओछी राजनीति है । राहुल गांधीको वास्तवमें महिलाओंकी चिन्ता होती तो अबतक कभी न कभी ‘लव जिहाद’, तीन तलाक और हलाला जैसी घृणित पद्धतियोंपर बोले होते । वर्तमानमें केरलका ईसाई समाज नित्य घटित होती ‘लव जिहाद’की घटनाओंसे त्रस्त  है । ऐसेमें राहुल गांधीकी इस विषयपर चुप्पी स्वार्थी राजनीतिकी द्योतक है । राहुल गांधीने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघको वे परिवार नहीं कहेंगे; यह भी हास्यास्पद है; क्योंकि वे स्वयं परिवारसे पृथक अकेले रहते हैं और संसारको ज्ञान दे रहे हैं ! यह उनका शुद्ध पाखण्ड है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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