साधको, यदि साधना सम्बन्धी एक ही बातको बार-बार बतानेपर आप उसे नहीं करते हैं तो समझ लें कि आपमें साधकत्व नहीं है ।
साधकत्व और गुरुकृपा या ईश्वरीय कृपाका सीधा सम्बन्ध होता है । इसलिए स्वयंके भीतर साधकत्व निर्माण करने हेतु प्रयत्नशील हों अन्यथा आनेवाले आपतकालमें आपको पछताना पडेगा और अब आपातकालकी तीव्रता बढनेमें समय नहीं बचा है अतः गम्भीर होकर साधक बननेका प्रयास करें ।
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