‘पारिश्रमिक लेते थे, कर्तव्य निभाते हुए मर गए, उन्हें हुतात्मा क्यों कहें’ : असमकी लेखिकाका ‘फेसबुक पोस्ट’, प्रविष्ट हुआ राष्ट्रद्रोहका प्रकरण


०७ अप्रैल, २०२१
ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढके बस्तर क्षेत्रके बीजापुर जनपदमें ४ अप्रैलको नक्सलियोंके साथ संघर्षमें २२ सैनिक हुतात्मा हुए थे ।
इस नक्सली आक्रमणके पश्चात असमकी एक लेखिका शिखा शर्माने उनकी ‘फेसबुक पोस्ट’पर लिखा था कि जो व्यक्ति, जिस कार्यका पारिश्रमिक लेते थे और जो अपना कर्तव्य निभाते मृत्युको प्राप्त हुए, उन्हें हुतात्मा नहीं कहा जा सकता । इस तर्कसे तो यदि विद्युत विभागमें कोई श्रमिक विद्युत प्रवाहसे मृत्युको प्राप्त होता है तो उसे भी हुतात्मा कहा जाना चाहिए ।” लेखिकाको गुवाहटी पुलिसने राष्ट्रद्रोहके आरोपके अन्तर्गत अपनी अभिरक्षामें लिया ।
    राष्ट्रद्रोही मानसिकताके लोगोंको राष्ट्रकी रक्षाके लिए हुतात्मा हुए सैनिकोंका अपमान करनेका दण्ड अवश्य मिलना ही चाहिए । न्यायालय ऐसा दण्ड निर्धारित करे जो समाजके लिए सर्वोच्च उदाहरण हो । तब ही यह निधर्मी वर्ग उचित मार्गपर चलेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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