छबडीमें मुसलमानोंने मचाया उत्पात, पुलिस हुई विवश
१४ अप्रैल, २०२१
राजस्थानके बारां जनपदमें आततायियोंने कई करोडकी सम्पत्तियोंको नष्ट कर डाला । स्थानीय निवासियोंके लाखों रुपयोंकी सामग्री लूट ली । घरों और व्यापारिक संस्थानोंको अग्निकी भेंट चढा दिया गया । उनके वाहन और औषधियोंकी आपणियोंको (दुकानोंको) भी लूटकर पूर्णतः नष्ट कर दिया गया । शासकीय परिवहनकी बसोंको भी तोडकर कचरेका रूप दे दिया गया; यहांतक कि अग्निशमन विभागके वाहनोंको भारी क्षति पहुंचाई गई । दूसरे दिवस शान्ति सभामें एक व्यापारीने रोते हुए बताया कि उसके विक्रय केन्द्रसे ३५ लाख रुपयोंके ७०० चलभाष उपकरण लूट लिए गए । वहां पहुंचकर भी वह उपद्रवके कारण कुछ नहीं कर सका, केवल अपनी दुर्दशा देखता रहा । उपद्रवियोंने केवल हिन्दुओंके संस्थानोंको ही लक्ष्य बनाया ।
पुलिसने ‘आंसूगैस’के गोले बरसाए तो उपद्रवियोंने पुलिसको भी मार-मारकर भगा दिया । एक दिवस पूर्व ठेलेसे फल क्रय करते हुए हिन्दूको एक मुसलमानने, थोडेसे विवादके कारण चाकू घोंप दिया था और अगले दिवस उन्हीं मुसलमान जिहादियोंने वहां यह उत्पात किया, जिसके कारण पचास सहस्रकी जनसङ्ख्याको घरोंमें दुबककर रहना पडा । पूरे क्षेत्रमें ‘कर्फ्यू’ लगा दिया गया । दूध, जल, विद्युत, औषधियों और अन्तर्जालको अवरुद्ध कर दिया गया । औषधियोंके संस्थानोंको लूट लिया गया, जिससे रोगियोंके लिए आपूर्ति अवरुद्ध हो गई । अग्निशमन वाहन क्षतिग्रस्त हो जानेसे आग नहीं बुझाई जा सकी । प्रशासकीय शान्ति बैठकमें बताया गया कि ६९ आपणियोंको जलाकर भस्म कर दिया गया, जिससे १५ करोड रुपयोंकी हानि हुई । गुर्जर समाजको भारी क्षति पहुंचानेके कारण, भाजपाने विफल गहलोत शासनपर एक पक्षीय तुष्टीकरणके समर्थनका आरोप लगाया ।
जिहादियोंके लिए एक पक्षमें शासन करनेवाला राजनीतिक दल केवल अपने सिंहासनको बनाए रहने हेतु जीवित रहना चाहता है । उसे हिन्दुओंसे कोई लेना-देना नहीं है । ऐसे शासनको तुरन्त ही पदमुक्तकर, राष्ट्रपति शासन प्रयुक्त किया जाना उचित होगा; अन्यथा आगामी दिवसोंमें पुनः ऐसे उपद्रव देखने पड सकते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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