प्रयुक्त मुखावरणसे बना दिए गद्दे, खादी भण्डारका स्वामी बनाया गया बन्दी
१३ अप्रैल, २०२१
महाराष्ट्रमें ‘कोरोना वायरस’के प्रकरण बहुत तीव्रतासे बढते जा रहे हैं । ऐसेमें इस समयमें अचम्भित करनेवाला प्रकरण सामने आया है । जलगांवमें एक खादी भण्डारवाला ‘कोरोना’ रोगियोंके प्रयोगवाले मुखावरणद्वारा ही गद्दी बनाकर बेचनेके प्रयासमें था । उसके पश्चात उसका परिवाद (शिकायत) एक व्यक्तिद्वारा पुलिससे करनेपर उसे तत्काल बन्दी बना लिया गया ।
महाराष्ट्र खादी भण्डारके संचालक अहमद मंसूरीने ‘कोरोना’ रोगियोंके प्रयोगवाले मुखावरणद्वारा ही गद्दी बनाकर बेचनेका विचार किया और उसने वैसी गद्दी बनाई भी और विक्रय करनेका अवसर ढूंढ रहा था । अहमद मंसूरीको बन्दी बनानेके पश्चात उसके विरुद्ध ‘धारा १८८/२६९’के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट हुआ है । पुलिसने इस प्रकरणपर बताया कि उसे हमने गद्दी सहित बन्दी बनाया है । आगे जांच चल रही है, जिसमें यह भी जांच की जा रही है कि उसने अबतक कितनी गद्दी बनाई और कितनी बेची है ?
मानव सभ्यता हो या जीव-जन्तु या प्रकृति; कुछ भी ले लीजिए, कहीं भी जिहादियोंका सकारात्मक योगदान नहीं मिलेगा । जिहादी किसी भी क्षेत्रमें हो; परन्तु मानवताके विरुद्ध कार्य करनेके लिए नूतन प्रकार ढूंढते रहते हैं । प्रयोगमें लाए गए मुखावरणसे गद्दी बनाना व्यापारका निकृष्ट ढंग है । यह कैसा धर्म है, जिसमें एक ओर मानवताके विरुद्ध षड्यन्त्र करेंगे और दूसरी ओर मूलपर ब्याज न लेनेका नाटक करते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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