कहां जन्मे रामभक्त हनुमान ? जन्म स्थानको लेकर २ राज्योंपर हो रहा विवाद
१३ अप्रैल, २०२१
हनुमानजीका जन्म कहां हुआ था ? इसको लेकर कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेशमें विवाद छिड गया है । दोनों राज्योंने प्रमाण दिया है कि भगवान हनुमानका जन्म स्थान उनके क्षेत्रमें है; परन्तु अब कर्नाटकके शिवमोगामें एक अन्य धार्मिक प्रमुखने हनुमानजीके जन्म स्थानको लेकर नूतन वक्तव्य किया है । उनका कहना है कि भगवान रामके विश्वासपात्र हनुमानजीका जन्म कर्नाटकके उत्तर कन्नड जनपदके तीर्थस्थल गोकर्णमें हुआ था ।
वहीं, इससे पूर्व कर्नाटककी ओरसे यह ‘दावा’ किया जाता रहा है कि हनुमानका जन्म हकोप्पल जनपदके एंगुंडीके निकट किष्किन्ध्यामें अंजनाद्रि पहाडीपर हुआ था । दूसरी ओर आन्ध्र प्रदेशके अनुसार, हनुमानजीकी जन्मभूमि तिरुपतिकी ७ पहाडियोंमेंसे एकपर है । इस पहाडीका नाम भी अंजनाद्रि है ।
बताया जाता है कि तिरुपतिमें स्थित तिरुमला मन्दिर हिन्दुओंकी मान्यताका बडा केन्द्र है । तेलुगुमें तिरुमलाका अर्थ होता है, सात पहाडियां । यह मन्दिर इन्हीं सात पहाडियोंको पार करनेपर आता है ।
प्रमाणके अनुसार, हनुमानजीके जन्म स्थानको लेकर शिवमोगाकी रामचन्द्रपुरा मठके प्रमुख राघवेश्वरा भारती रामायणका प्रमाण देते हुए कहते हैं कि हनुमानजीने सीताजीको बताया था कि उनका जन्म समुद्र तटीय गोकर्णमें हुआ था । उन्होंने कहा, “रामायणमें साक्ष्योंके आधारपर हम कह सकते हैं कि गोकर्ण हनुमानजीकी जन्मभूमि है और किष्किन्धामें अंजनाद्रि उनकी कर्मभूमि थी ।”
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ‘टीटीडी’द्वारा गठित एक विशेषज्ञ ‘पैनल’ २१ अप्रैलको इस प्रकरणपर अपनी ‘रिपोर्ट’ सौंप सकता है । ‘पैनल’में वैदिक विद्वानों, पुरातत्त्वविदों और एक ‘इसरो’ वैज्ञानिक भी सम्मिलित हैं ।
हनुमानजीके जन्मस्थानपर मूढ जैसे लडनेके स्थानपर इसी समयका सदुपयोग मन्दिरों व उनके लोगोंने हनुमानजीके ज्ञान व भक्तिके प्रचार व प्रसारमें देना चाहिए । हनुमानजी कहां जन्मे थे ? इस प्रश्नसे अधिक आज हिन्दुओंको धर्मज्ञानकी आवश्यकता है और यदि इतना ही आवश्यक है तो इस प्रकरणमें योग्य कृति यह है कि इसमें शास्त्रोंद्वारा प्रमाण और वैदिक विद्वानोंकी सहायता लेनी चाहिए । दोनों राज्योंको इस प्रक्रियामें सहायता करनी चाहिए, न कि लडना चाहिए ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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