जम्मू-कश्मीरमें मस्जिद बनी आतङ्कियोंका सुरक्षा कवच, पुलिसद्वारा आत्मसमर्पणके उत्तम प्रयास हुए विफल
११ अप्रैल, २०२१
गत एक वर्षमें जम्मू-कश्मीरमें ३ अवसरोंमें आतङ्कियोंने किसी मस्जिदमें शरण ली है । पुलिस सूत्रोंने जानकारी दी है कि शुक्रवार, ९ अप्रैल २०२१ को शोपियांमें हुए आतङ्की आक्रमणमें भी एक मस्जिदका दुरुपयोग किया गया । इससे पूर्व १९ जून, २०२० को पंपोर और १ जुलाईको सोपोरमें हुई आतङ्की घटनाओंमें भी मस्जिदका दुरुपयोग किया गया था ।
कुछ दिवस पूर्व शोपियांमें मस्जिदको हानि पहुंचाए बिना आतङ्कियोंको मार गिराना पुलिस और सुरक्षा बलोंके लिए एक कठोर चुनौती थी । कश्मीरमें आतङ्कियोंके विरुद्ध ‘मिशन’में लगे ‘विक्टर बल’के ‘कमाण्डर प्रमुख’ ‘मेजर जनरल’ राशिन बलीने कहा कि सुरक्षा बलोंकी प्रमुख चिन्ता थी कि मस्जिदकी पवित्रताको कैसे बचाएं ? किन्तु इस मध्य सैन्य कर्मियोंको घोर सङ्कटका सामना करना पडा । सभी आतङ्की शस्त्रोंसे सज्ज थे । ‘मेजर जनरल’ने कहा कि राज्यके विरुद्ध शस्त्र उठानेका एक ही अर्थ है कि इधरसे भी वैसी ही प्रतिक्रिया दी जाएगी । मस्जिदमें पांचो आतङ्कियोंको घोर सङ्घर्षपूर्वक मार गिराया गया ।
मस्जिदोंका जिस प्रकारसे आतङ्की घटनाओं हेतु उपयोग हो रहा है, उसकी सभ्य समाज और ‘मीडिया’को कठोर कार्यवाही हेतु सैन्य बलोंका पूर्ण सहयोग करना चाहिए ।
‘दरगाह’ व ‘मजारों’ जैसे स्थलोंका वैश्विक स्तरपर कुकुरमुत्तेकी भांति फलने-फूलने देना व्यापक रूपसे अहितकर रहा है । केवल निन्दा करनेसे कोई लाभ नहीं ! इस सत्यका साक्षी इस धराका प्रत्येक व्यक्ति है । प्रार्थनाके नामपर केवल आडम्बर व साम्राज्यवादका षड्यन्त्र ऐसे स्थलोंका यही कार्य रहा है, जिसे पूर्णरूपेण हतोत्साहितकर प्रतिबन्धित करना सभी राज्योंके व राष्ट्रोंके परमहितमें है और आवश्यकता पडनेपर आतङ्कियों सहित उडाना भी; क्योंकि जो स्थान बार-बार आतङ्कियों हेतु पोषक बन रहा हो, वहां कमसे कम धर्म तो नहीं सिखाया जाता होगा, यह तो कोई भी समझ सकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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