‘कोरोना’के विरुद्ध युद्धमें आगे आए अखाडे, कुम्भ समाप्तिकी घोषणा
१६ अप्रैल, २०२१
‘कोरोना वायरस’के प्रसारको देखते हुए साधुओंके कुछ अखाडोंने हरिद्वारके कुम्भकी समाप्तिकी घोषणा कर दी है । कोरोनाके दिशा निर्देशोंका व्यवस्थित पालन हो, इस उद्देश्यसे अखाडोंने यह निर्णय लिया । निरंजनी अखाडा तथा आनन्द अखाडेने १७ अप्रैल २०२१ को कुम्भ समाप्तिकी घोषणा की है । सचिव महन्त रविन्द्र पुरीने यह घोषणा करते हुए कहा कि यह अखाडा परिषदका निर्णय न होकर यह उनका निजी निर्णय है । उन्होंने कहा कि अधिकतर अखाडे यही विचार रखते हैं । उन्होंने कहा कि २७ अप्रैल २०२१ के शाही स्नानमें ४०,५० पन्थी स्नान करके लौट जाएंगे । निरंजनी अखाडेके निर्णयके उपरान्त अन्य ५ संन्यासी अखाडे भी ऐसा ही निर्णय ले सकते हैं । पर्व स्नान (शाही स्नान) जो २७ अप्रैलको है, उसमें मात्र ३ बैरागी, २ उदासीन और १ निर्मल अखाडा ही रह जाएगा ।
इससे जनता कुम्भमें नहीं जाएगी । कुछ साधुओंके चुने हुए प्रतिनिधि ही पर्व स्नान करेंगे । वैसे ही जैसे मन्दिरोंमें मात्र पुजारियोंको पूजनकी अनुमति है; परन्तु भक्तोंके लिए वर्तमानमें दर्शनपर प्रतिबन्ध है । उत्तराखंडके मुख्यमन्त्री तीरथ सिंह रावतने उच्चस्तरीय बैठक रखी है, जिसमें वे ‘कोरोना’की वर्तमान स्थितिपर चर्चा करेंगे । इसमें कुम्भ, राज्यमें अन्य राज्योंसे प्रवेश करने तथा रात्रि निषेधाज्ञाके समयको बढाने आदिपर निर्णय लिया जाएगा । कुल सक्रिय ‘कोरोना’ रोगियोंकी सङ्ख्यामें उत्तराखंड अभी १९ वें स्थानपर है । यहां १२४८४ सक्रिय ‘कोरोना’ रोगी हैं, जबकि हरिद्वारमें इनकी सङ्ख्या ३६१२ है ।
कुम्भके सम्बन्धित जैसा निर्णय अखाडे स्वयं ले रहे हैं, उससे उनकी तुलना ‘तबलीगी जमात’से करनेवालोंके मुखपर थप्पड पडा है । सीएट टायर बनानेवाले समूहके प्रबन्धक हर्ष गोयनका, शिवसेना नेता संजय राउत तथा अभिनेत्री सिमी ग्रेवालने कुम्भ तथा वहांके साधुओंका परिहास किया था ।
इन धर्मद्रोही हिन्दुओंद्वारा साधुओंका परिहास करना, उनकी ‘तबलीगी जमात’से तुलना करना लज्जाजनक है । सर्वविदित है कि गत वर्ष ‘तबलीगी जमात’ थूक-थूककर मस्जिदोंमें छुपकर तथा उनके ‘मौलाना’ सादकी अवैज्ञानिक बातोंमें आकर देशमें ‘कोरोना’ फैलानेमें अग्रिम भूमिकामें आई थी । इसके विपरीत कुम्भमें ‘कोरोना’ नियमोंका कठोरतासे पालन किया गया तथा अब जबकि एक मुख्य पर्व स्नान शेष है, अखाडोंद्वारा एक-एक करके जनहितमें कुम्भ समाप्तिकी घोषणा की जा रही है । हमें गर्व है कि हम उस सनातन संस्कृतिसे हैं, जिसमें सन्तोंके निर्णय अशास्त्रीय, मूर्खतापूर्ण न होकर मानवीय आधारपर होते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply