‘वैक्सीन’की कच्ची सामग्रीके निर्यातपर अमेरिकाने लगाया प्रतिबन्ध, ‘बायडेन’को पूनावालाने कहा, एकजुट हैं तो हटाइए
१७ अप्रैल, २०२१
‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई)’के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावालाने अमेरिकाके राष्ट्रपति जो बायडेनसे ‘वैक्सीन’के लिए आवश्यक कच्चे ‘माल’के निर्यातपर लगे प्रतिबन्धको हटानेका अनुरोध किया है । इससे पहले पूनावालाने कहा था कि अमेरिका और यूरोपीय देशोंके द्वारा ‘वैक्सीन’ निर्माणके लिए आवश्यक कच्चे ‘माल’के निर्यातपर लगे प्रतिबन्धके कारण देशमें ‘वैक्सीन’ उत्पादन प्रभावित हो रहा है । ‘ट्विटर’पर अमेरिकी राष्ट्रपतिको ‘टैग’ करते हुए ‘एसआईआई’के ‘सीईओ’ अदार पूनावालाने कहा, “यदि हम इस ‘वायरस’को पराजित करनेके लिए एकजुट हैं तो अमेरिकाके बाहर स्थित ‘वैक्सीन’ उत्पादकोंकी ओरसे मैं अमेरिकी राष्ट्रपतिसे यह अनुरोध करता हूं कि ‘वैक्सीन’के लिए आवश्यक कच्चे ‘माल’के निर्यातपर लगे प्रतिबन्धको हटाया जाए, जिससे ‘वैक्सीन’ उत्पादनको बढाया जा सके ।” उन्होंने ‘ट्वीट’में यह भी लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपतिके प्रशासनके पास पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई । ज्ञात हो कि अमेरिका और यूरोपीय देशोंने ‘वैक्सीन’ निर्माणके लिए आवश्यक कच्चे ‘माल’के निर्यातपर प्रतिबन्ध लगा दिया है । इस कच्चे ‘माल’में ‘फिल्टर’, ‘बैग’ और कुछ गुणवर्धक रसायन सम्मिलित हैं, जो ‘वैक्सीन’ निर्माणके लिए सबसे आवश्यक वस्तुओंमेंसे हैं । गुणवर्धक रसायन शरीरमें ‘एंटी-बॉडी’के निर्माणमें सहायता करता है, जिससे शरीरका ‘इम्यून सिस्टम’ सशक्त होता है और उसे ‘एंटीजन’से लडनेमें सहायता मिलती है ।
‘इंडिया टुडे’को दिए गए एक साक्षात्कारमें पूनावालाने कहा था कि यदि सम्भव होता तो वो अमेरिका जाकर वहां प्रदर्शन करते और कहते कि अमेरिकाके द्वारा कच्चे ‘माल’के निर्यातको सीमित करने अथवा रोकनेसे भारत सहित विश्वके कई अन्य ‘वैक्सीन’ निर्माताओंको समस्याका सामना करना पड रहा है । उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशोंके इस निर्णयसे देशमें ‘वैक्सीन’ निर्माण प्रभावित हो रहा है ।
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं पूंजीपतियोंद्वारा संचालित अमेरीकी संसद व प्रशासन किसी अन्य राष्ट्रको किसी भी क्षेत्रमें अग्रणी नहीं देख सकती । आज भारतने मानवताके पदचिह्नोंपर चलते हुए ‘कोरोना वैक्सीन’ अन्य देशोंको भेजी है, उससे विश्वमें भारतको नूतन महाशक्तिके रूपमें देखा जा रहा है, जिसके चलते अमेरीकाको अपना शीर्ष उपाधिवाला पद खोनेका भय होनेसे ऐसे प्रतिबन्ध लगाकर अपनी महत्ता दर्शा रहा है । भारतको आरम्भसे ही इस विषयमें आत्मनिर्भरता रखनी चाहिए थी और यह हमारे लिए लज्जाका विषय है कि जहां आयुर्वेद है, वहां इस छोटेसे विषाणुके लिए अमेरिकाके सामने हाथ फैलाने पड रहे हैं । इससे स्पष्ट है कि भारत शासनने इस महामारीपर आयुर्वेदमें कोई शोध नहीं करवाया ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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