‘रेमडेसिविर’के स्थानपर ‘कोरोना’ रोगियोंको सामान्य ‘इंजेक्शन’ लगाती थी नर्स, वास्तविक ‘इंजेक्शन’ ‘कालाबाजारी’के लिए प्रेमीको दे देती
२३ अप्रैल, २०२१
‘कोरोना’के बढते सङ्क्रमणके मध्य ‘रेमडेसिविर इंजेक्शन’की व्यापक आवश्यकता है । इसका लाभ उठाकर कुछ तत्त्व ‘कालाबाजारी’में लगे हुए हैं । मध्य प्रदेशसे इस ‘इंजेक्शन’के विक्रयका एक विचित्र प्रकरण सामने आया है । भोपालके जेके चिकित्सालयकी परिचारिका (नर्स) रोगियोंका ‘रेमडेसिविर इंजेक्शन’ चुराकर उसे अपने प्रेमीको ‘ब्लैक मार्केट’में विक्रयके लिए दे देती थी । प्रकरण तब सार्वजनिक हुआ हुआ, जब राजधानीकी कोलार पुलिसने ‘इंजेक्शन’की ‘कालाबाजारी’को लेकर एक व्यक्तिको बन्दी बनाया था । उसका अभिज्ञान गिरधर कॉम्प्लेक्स, दानिशकुंज निवासी झलकन सिंहके रूपमें किया गया है । उसकी प्रेमिका शालिनी जेके चिकित्सालयमें ‘नर्सिंग’ कर्मचारी है । वह रोगियोंको सामान्य ‘इंजेक्शन’ लगाकर वास्तविक उसे दे देती थी । एक ‘इंजेक्शन’को वह २०-३० सहस्र रुपएमें विक्रय करता था । प्रकरण सार्वजनिक होनेके पश्चात आरोपी परिचारिका भागनेमें सफल रही है ।
लोभी लकन सिंह व उसकी प्रेमिका जैसे लोग समूचे समाजपर कलङ्क हैं । रामराज्यमें केवल उच्च प्रज्ञाशक्तिसे युक्त चिकित्सक ही लोगोंका उपचार करेंगे और उनके लिए रोगीके जीवनसे अधिक मूल्यवान कोई वस्तु नहीं होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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